विशेष गहन पुनरीक्षण दस्तावेज़ सूची में राशन कार्डों को मान्यता क्यों नहीं दी गई, इसका उत्तर स्पष्ट होता जा रहा है। नागरिकता की पहचान तो दूर की बात है, धीरे-धीरे राशन कार्ड पहचान पत्र के रूप में भी स्वीकार नहीं किए जाएँगे। यह प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। नरेंद्र मोदी सरकार ने तय किया है कि आयकरदाताओं को न केवल राशन नहीं मिलेगा, बल्कि जो लोग राशन के तहत सस्ता या मुफ्त अनाज पाने के पात्र नहीं हैं, उनके कार्ड भी रद्द कर दिए जाएँगे। केंद्र राज्यों से इस संबंध में कदम उठाने को कह रहा है। केंद्र ने केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड और आयकर विभाग से करदाताओं की संख्या और आय सीमा के बारे में विस्तृत जानकारी ली है। अब उस जानकारी का मिलान राशन कार्डधारकों की सूची से किया जा रहा है। केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग यह देख रहा है कि कितने आयकरदाताओं के पास राशन कार्ड हैं और उन्होंने कितना कर चुकाया है। देश भर में 1.17 करोड़ कार्डों की पहचान पहले ही की जा चुकी है। इन्हें 30 सितंबर तक लाभार्थी सूची से हटाने को कहा गया है। केंद्र का दावा है कि इन कार्डधारकों को खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत कोई भी राशन सेवा नहीं मिलनी चाहिए। इसलिए, ये सभी कार्ड रद्द कर दिए जाएँगे। बात यहीं खत्म नहीं होती। इस सूची को तैयार करने के साथ ही राशन कार्ड धारकों की सामाजिक और आजीविका की स्थिति को समग्र रूप से देखा जाएगा। आयकर विभाग के अनुसार, ऐसे नागरिकों की संख्या जो राशन का लाभ ले रहे हैं लेकिन आयकर भी दे रहे हैं, 94 लाख 71 हजार है। खाद्य मंत्रालय ने कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय से देखा है कि 5 लाख 31 हजार ऐसे राशन कार्ड धारक हैं जो किसी न किसी कंपनी के मालिक हैं। फिर, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार, यह पता चला है कि 17 लाख 51 हजार राशन कार्ड धारकों के पास कारें भी हैं। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अनुसार, जो लोग मुफ्त और सस्ता राशन पाने के हकदार हैं, वे राशन कार्ड धारक होंगे। लेकिन यह देखा जा रहा है कि सरकारी कर्मचारी, करदाता, कार मालिक भी राशन ले रहे हैं। सीबीडीटी और आयकर विभाग द्वारा बनाए गए डेटाबैंक में पहले चरण के आंकड़े दिए गए हैं। अगले चरण की जानकारी तैयार की जा रही है। केंद्र दिशानिर्देश जारी कर रहा है, अपने राशन कार्ड खुद सरेंडर करें। जो वाकई मुफ्त राशन पाने के हकदार हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में करीब 10.5 करोड़ लोगों ने आयकर रिटर्न दाखिल किया है। हालांकि, सिर्फ इसलिए कि वे आयकर रिटर्न दाखिल करते हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि वे सभी करदाता हैं। लाखों लोगों का कर रिटर्न शून्य है। इसलिए खाद्य मंत्रालय ने यह जानकारी जाननी चाही है कि किसने आयकर का भुगतान किया है। सिर्फ दिल्ली जैसे हाई-प्रोफाइल शहरों में ही 6 लाख 72 हजार राशन कार्ड पाए गए हैं। वे जमीन के मालिक हैं, बैंक में अच्छा-खासा पैसा है, उनकी अपनी कंपनियां हैं या वे ऊंचे पदों पर कार्यरत हैं। वे भी मुफ्त राशन का लाभ ले रहे हैं। यह चलन देशव्यापी है। इसलिए अगर वे करदाता हैं, तो उन्हें राशन नहीं मिलेगा और कार्ड भी रद्द हो जाएगा।
