नवगठित दुर्गापूजा समन्वय समिति (DPSS) ने दुर्गा पूजा आयोजकों को एक साझा मंच पर लाने की पहल की है। समिति ने अपने आधिकारिक लोगो और वेबसाइट का भी अनावरण किया है। DPSS का उद्देश्य पश्चिम बंगाल की दुर्गा पूजा से जुड़े आयोजकों को एकजुट करना है। इसके साथ ही समिति जमीनी स्तर पर काम करने वाले कारीगरों और कलाकारों को सहयोग देने की योजना बना रही है। संगठन का कहना है कि दुर्गा पूजा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि बंगाल की सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा है। इसी विरासत को संरक्षित करने के लिए अलग-अलग स्तरों पर योजनाएं तैयार की जा रही हैं। समिति आने वाले समय में पूजा आयोजकों और कारीगरों के लिए कई नई पहल शुरू करने की तैयारी में है। DPSS ने दुर्गा पूजा के दौरान VIP पास संस्कृति को खत्म करने की बात कही है। समिति के अध्यक्ष रुद्रनील घोष ने कहा कि पूजा में असली VIP बुजुर्ग, दिव्यांग और वंचित वर्ग के लोग होने चाहिए। उनके मुताबिक, दुर्गा पूजा ऐसा उत्सव है जिसमें हर व्यक्ति को समान रूप से शामिल होने का अवसर मिलना चाहिए। VIP पास के कारण आम श्रद्धालुओं और दूसरे लोगों को कई बार असुविधाओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में समिति ने पूजा के दौरान समानता और सहज पहुंच को प्राथमिकता देने की बात कही है। इस पहल का उद्देश्य उत्सव को ज्यादा समावेशी और आम लोगों के करीब बनाना है। समिति का कहना है कि पूजा की असली भावना लोगों को जोड़ने में है, न कि उन्हें अलग-अलग श्रेणियों में बांटने में। DPSS के अनुसार अब तक 780 दुर्गा पूजा कमेटियां संगठन के साथ जुड़ चुकी हैं। इनमें कोलकाता की कई चर्चित पूजा समितियां भी शामिल हैं। बालीगंज कल्चरल, चालताबागान, चोरबागान और कस्बा बोसपुकुर जैसी पूजा कमेटियों ने भी इसमें नामांकन कराया है। संगठन के मुताबिक, देश के अलग-अलग शहरों की पूजा समितियां भी इससे जुड़ रही हैं। मुंबई और बेंगलुरु के अलावा विदेशों में न्यूयॉर्क, दुबई और लंदन की पूजा समितियों का भी नामांकन हुआ है। इससे DPSS का दायरा केवल बंगाल तक सीमित न रहकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचता दिखाई दे रहा है। समिति का लक्ष्य आने वाले समय में ज्यादा से ज्यादा पूजा आयोजकों को एक मंच पर लाना है। DPSS ने दुर्गा पूजा से जुड़े कारीगरों और कलाकारों के कल्याण के लिए भी योजनाएं तैयार की हैं। समिति की ओर से आर्टिजन वेलफेयर फंड बनाने की योजना है। इसका उद्देश्य पूजा पंडालों, प्रतिमाओं और सजावट से जुड़े कारीगरों को सहयोग देना है। दुर्गा पूजा की तैयारियों में बड़ी संख्या में स्थानीय कलाकार और हस्तशिल्प से जुड़े लोग काम करते हैं। समिति का कहना है कि बंगाल की पूजा परंपरा को आगे बढ़ाने में इन कारीगरों की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में उनकी आर्थिक और सामाजिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सहायता व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया जाएगा। इस पहल के जरिए स्थानीय कला और पारंपरिक शिल्प को भी बढ़ावा देने की कोशिश की जाएगी। DPSS ने पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए पूजा और विसर्जन के लिए दिशा-निर्देश तैयार करने की योजना बनाई है। समिति का उद्देश्य पूजा आयोजन के दौरान पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करना है। इसके लिए पर्यावरण-अनुकूल सामग्री और जिम्मेदार विसर्जन व्यवस्था को बढ़ावा देने की बात कही गई है। समिति पूजा कमेटियों के लिए ऐसे दिशा-निर्देश तैयार करेगी, जिन्हें अलग-अलग आयोजनों में लागू किया जा सके। इससे पूजा और पर्यावरण संरक्षण के बीच बेहतर संतुलन बनाने की कोशिश होगी। साथ ही, आयोजकों को जरूरी नियमों और प्रक्रियाओं की जानकारी भी उपलब्ध कराने की योजना है। DPSS के एजेंडे में सांस्कृतिक विरासत के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। पूजा आयोजकों के लिए सिंगल विंडो क्लियरेंस व्यवस्था शुरू करने की योजना भी DPSS के एजेंडे में शामिल है। इसका उद्देश्य अलग-अलग अनुमति और मंजूरी लेने की प्रक्रिया को आसान बनाना है। पूजा समितियों को आयोजन से पहले कई तरह की प्रशासनिक प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। ऐसे में एक साझा व्यवस्था के जरिए इन प्रक्रियाओं को सरल बनाने की कोशिश की जाएगी। समिति का मानना है कि इससे पूजा आयोजकों का समय और मेहनत दोनों बच सकते हैं। इस व्यवस्था के जरिए जरूरी मंजूरियों को लेकर बेहतर समन्वय स्थापित करने की कोशिश होगी। DPSS आने वाले समय में इस पहल को लेकर विस्तृत व्यवस्था तैयार करने की दिशा में काम करेगा। DPSS ने दुर्गा पूजा को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने के लिए सांस्कृतिक आदान-प्रदान की योजना भी बनाई है। विदेशों में होने वाली दुर्गा पूजा समितियों को भी इस नेटवर्क से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। न्यूयॉर्क, दुबई और लंदन जैसे शहरों की पूजा समितियों का जुड़ना इसी दिशा में एक कदम माना जा रहा है। सांस्कृतिक आदान-प्रदान के जरिए बंगाल की परंपरा और कला को दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाने की कोशिश होगी। समिति स्थानीय आयोजनों के साथ अंतरराष्ट्रीय पूजा आयोजनों के बीच संपर्क मजबूत करना चाहती है। इससे दुर्गा पूजा से जुड़ी परंपराओं और सांस्कृतिक गतिविधियों को व्यापक मंच मिल सकता है। DPSS का लक्ष्य दुर्गा पूजा की सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करते हुए इसे वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाना है।
