उत्तर कोलकाता के चोरबागान सर्वजनीन दुर्गा पूजा पंडाल में महासप्तमी की शाम हुई भगदड़ के मामले में सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर सवाल उठे हैं। हादसे में 19 श्रद्धालुओं की मौत और 25 लोगों के घायल होने की खबर के बीच मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी ने अस्थायी होमगार्ड्स की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मामले में केवल सुरक्षाकर्मियों ही नहीं, बल्कि पूजा समिति, पुलिस और अग्निशमन विभाग की जिम्मेदारी की भी जांच की जाएगी। घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद मुख्यमंत्री ने बताया कि शुरुआती रिपोर्ट में सामने आई जानकारी और मौके की वास्तविक स्थिति में अंतर था। उनके मुताबिक, पंडाल में प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग रास्ते बनाने के बजाय ड्यूटी पर तैनात अस्थायी होमगार्ड्स ने रस्सी के सहारे एक ही कॉमन गेट को दो हिस्सों में बांट रखा था। मुख्यमंत्री के अनुसार, शाम को तेज बारिश शुरू होने के बाद सुरक्षाकर्मी कथित तौर पर रस्सियां छोड़कर सुरक्षित जगहों पर चले गए। इसके बाद प्रवेश और निकास की ओर से आ रही भीड़ आपस में टकरा गई और भगदड़ मच गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि रविवार को घटनास्थल पर तैनात एक होमगार्ड से बातचीत के दौरान भाषा संबंधी समस्या सामने आई। उनके मुताबिक, वह होमगार्ड बांग्ला भाषा समझने में सक्षम नहीं था। अधिकारी ने संबंधित अधिकारियों से वर्ष 2024, 2025 और 2026 में नियुक्त किए गए अस्थायी होमगार्ड्स की सूची मांगी है। जांच में उनकी नियुक्ति प्रक्रिया, तैनाती और ड्यूटी संबंधी व्यवस्थाओं की पड़ताल किए जाने की बात कही गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाएगी। उन्होंने सवाल उठाया कि संकरी जगह और कम रोशनी के बावजूद कोलकाता पुलिस और अग्निशमन विभाग ने किस आधार पर एनओसी और लाइसेंस जारी किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच का दायरा केवल अस्थायी होमगार्ड्स तक सीमित नहीं रहेगा। आयोजन कराने वाली पूजा समिति और संबंधित सरकारी एजेंसियों की भूमिका भी जांची जाएगी। मुख्यमंत्री के अनुसार, आयोजक अपनी नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी ने पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि मौजूदा प्रशासन को पिछली सरकार की गलतियों और दोषपूर्ण व्यवस्थाओं का बोझ उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि व्यवस्था में सुधार करने में कुछ समय लगेगा। हादसे के कारणों, सुरक्षा इंतजामों और संबंधित विभागों की जवाबदेही को लेकर जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे। फिलहाल, मुख्यमंत्री की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और आधिकारिक जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है।