चोरबागान हादसे के बाद पश्चिम बंगाल का स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। दुर्गा पूजा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और आपात स्थिति में तत्काल इलाज उपलब्ध कराने के लिए कोलकाता के प्रमुख पूजा पंडालों में डॉक्टरों की तैनाती का फैसला लिया गया है। इसके साथ ही अस्पतालों को भी आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग की योजना के तहत कोलकाता के बड़े पूजा पंडालों के आसपास मेडिकल टीम तैनात की जाएगी। संतोष मित्रा स्क्वायर, टाला प्रत्यय, कॉलेज स्क्वायर, एकडालिया एवरग्रीन और चेतला अग्रणी जैसे प्रमुख पूजा आयोजनों में चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य भीड़ के दौरान किसी श्रद्धालु की तबीयत बिगड़ने या किसी आपात स्थिति में तुरंत इलाज सुनिश्चित करना है। निर्देशों के मुताबिक, प्रमुख पूजा पंडालों में शाम 5 बजे से अगले दिन सुबह 6 बजे तक डॉक्टरों की तैनाती की व्यवस्था की जाएगी। पूजा के दौरान शाम और रात में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पंडालों में पहुंचते हैं। ऐसे में मेडिकल टीम की मौजूदगी से जरूरत पड़ने पर प्राथमिक उपचार और समय पर अस्पताल पहुंचाने में मदद मिल सकती है। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों को आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था मजबूत रखने को कहा है। इसके तहत ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों, न्यूरोसर्जन और एनेस्थेटिस्ट की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। इसके अलावा एंबुलेंस, ऑक्सीजन और रक्त की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि किसी बड़े हादसे या अचानक मरीजों की संख्या बढ़ने की स्थिति में इलाज में देरी न हो। पूजा के दौरान स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों, इसके लिए डॉक्टरों, स्वास्थ्य अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियों को लेकर भी सख्त कदम उठाए गए हैं। विभाग का जोर इस बात पर है कि जरूरत पड़ने पर पर्याप्त चिकित्सा कर्मी उपलब्ध रहें और अस्पतालों में आपातकालीन सेवाएं सुचारु रूप से चलती रहें। कोलकाता के चोरबागान में पूजा के दौरान हुए हादसे के बाद बड़े आयोजनों में भीड़ प्रबंधन और आपातकालीन तैयारियों को लेकर चिंता बढ़ी है। पूजा पंडालों में डॉक्टरों की तैनाती और अस्पतालों को अलर्ट रखने का फैसला इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए भीड़ नियंत्रण, सुरक्षित प्रवेश और निकास मार्ग तथा प्रशासनिक निगरानी भी बेहद जरूरी हैं ।