तृणमूल नेता ममता बनर्जी ने एक बार फिर SIR मुद्दे पर केंद्र पर निशाना साधा। उन्होंने आम लोगों को भरोसा दिलाया कि जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से गलत तरीके से बाहर हो गए हैं, तृणमूल ट्रिब्यूनल में उनकी कानूनी लड़ाई में उनकी मदद करेगी। आर्थिक मदद दी जाएगी। लगभग यही घोषणा CPM ने भी की है। चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के बाद सोमवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सड़कों पर उतरीं। कॉलेज स्क्वायर से डोरीना क्रॉसिंग तक जुलूस निकालने के बाद मुख्यमंत्री सभा में शामिल हुईं। और उस सभा से उन्होंने एक बार फिर SIR पर अपनी आवाज उठाई। हाल ही में उन्होंने धर्मतला में लगातार तीन दिनों तक उन वोटरों के अधिकारों की रक्षा के लिए धरना दिया था, जिनके नाम SIR से हटा दिए गए थे। इस बार उन्होंने केंद्र सरकार के साथ-साथ चुनाव आयोग पर भी दबाव बढ़ाने की रणनीति अपनाई। इस दिन मुख्यमंत्री ने देश भर में आम लोगों को बार-बार लाइनों में खड़ा करके परेशान करने की कड़ी आलोचना की। SIR की वजह से आम लोगों को हो रही बहुत ज़्यादा तकलीफ़ और मौतों पर रोशनी डालते हुए ममता ने कहा, “नोटबंदी के लिए लाइनें, कोरोना के दौरान वैक्सीन के लिए लाइनें, आधार कार्ड के लिए लाइनें, अब फिर से SIR के लिए लाइनें, लोगों को और कितनी लाइनों में खड़ा होना पड़ेगा! SIR प्रोसेस में पहले ही 200 लोग मर चुके हैं। वह भी काफ़ी नहीं है। अब फिर से गैस के लिए लाइनें। और कितनी लाइनों में लगना पड़ेगा? आने वाले दिनों में लोग आपको (BJP) लाइनों में लगने के लिए लाइन में बुलाएँगे।” मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि SIR प्रोसेस में जानबूझकर वोटरों के नाम काटे गए। उन्होंने सीधा हमला करते हुए कहा, “SIR के नाम पर लोगों के नाम काटो, NRC के नाम पर डिटेंशन कैंप बनाओ और जनगणना के नाम पर लोगों को भेजो। जान लो कि बंगाल में ऐसा कुछ नहीं होगा। हमें सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा है।” मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि दूसरे राज्यों को छोड़कर बंगाल को बार-बार टारगेट क्यों किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “आपने किसी दूसरे राज्य को टारगेट नहीं किया। बिहार में कोई लॉजिस्टिक गड़बड़ी नहीं है, तो बंगाल में क्यों? 48 लाख वोटर्स के नाम 2002 की लिस्ट से मैप किए गए हैं। फिर भी, आपने उन्हें बाहर कर दिया? क्या लोग इसका जवाब नहीं चाहेंगे?” बिहार के राजनीतिक हालात पर तंज कसते हुए उन्होंने आगे कहा, “बिहार में चुनाव से पहले नीतीश कुमार और चुनाव के बाद फिनिश कुमार! चुनाव से पहले दस हज़ार और चुनाव के बाद बुलडोज़र।” उन्होंने आम आदमी को सलाह दी कि अगर SIR में उनका नाम बाहर भी हो जाए तो वे घबराएं नहीं। कानूनी लड़ाई का पूरा खाका बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “जब सप्लीमेंट्री लिस्ट आएगी, तो जिनके नाम बाहर हो गए हैं, वे ट्रिब्यूनल में अप्लाई करेंगे। वकील (तृणमूल द्वारा अपॉइंट किए गए) आपकी फ्री में मदद करेंगे। हम कोशिश करेंगे कि आपका नाम फिर से लिस्ट में जुड़ सके।” मुख्यमंत्री के इस बयान से साफ पता चलता है कि वे राज्य के लोगों के डेमोक्रेटिक अधिकारों की रक्षा के लिए एक इंच भी ज़मीन छोड़ने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने केंद्र को याद दिलाया, “लोग आपको धक्का देंगे। हमें ऐसा करने की ज़रूरत नहीं है। डेमोक्रेसी आपको धक्का देगी। देश आपको धक्का देगा। बंगाल देगा। क्योंकि बंगाल ने हारना नहीं सीखा है। बंगाल कभी हारता नहीं है। यह बात ध्यान में रखें।”
