गिरीश पार्क में हुई हिंसा के मामले में पुलिस ने पहले ही खुद से केस दर्ज कर लिया है। इस घटना में तोड़फोड़ के आरोप में चार लोगों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, शशि पांजा के घर के क्लोज सर्किट कैमरे की फुटेज इकट्ठा करने का काम शुरू हो गया है। इसके अलावा, अलग-अलग मीडिया आउटलेट्स से फुटेज की जांच करके हिंसा में शामिल लोगों की पहचान करने का काम शुरू हो गया है। इस बीच, नेशनल इलेक्शन कमीशन ने इस घटना पर अपना गुस्सा जाहिर किया है। गिरीश पार्क में हुई हिंसा में सेंट्रल फोर्स का इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया? नेशनल इलेक्शन कमीशन इस बात से काफी नाराज है। इलेक्शन कमीशन ने इस घटना के बारे में कोलकाता पुलिस कमिश्नर सुप्रतिम सरकार से पहले ही रिपोर्ट मांगी है। शनिवार दोपहर को गिरीश पार्क में राज्य मंत्री शशि पांजा के घर पर हमले का आरोप लगा था। BJP कार्यकर्ताओं की पिटाई के भी जवाबी आरोप लगे हैं। आरोपों से गरमाए सुप्रतिम से गिरीश पार्क में हुई हिंसा पर 48 घंटे के अंदर रिपोर्ट देने को कहा गया है। पता चला है कि कमीशन ने सेंट्रल फोर्स की गैरमौजूदगी पर भी सवाल उठाए हैं। इस बारे में चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने कहा, “कार्यकर्ता और समर्थक प्रधानमंत्री की मीटिंग में शामिल होने जा रहे थे। राज्य के एक मंत्री के घर पर हमले के आरोप थे। कोलकाता समेत राज्य के अलग-अलग हिस्सों में सेंट्रल फोर्स की तैनाती के बावजूद, इलाके में करीब एक घंटे तक अशांति बनी रही। उसके बाद भी वहां कोई सेंट्रल फोर्स नहीं दिखी।”
