पश्चिम बंगाल में एक बार फिर ममता बनर्जी की साल 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान नंदीग्राम के बिरुलिया बाजार में लगी चोट को लेकर राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दावा किया कि उस दौरान ममता बनर्जी को कोई गंभीर चोट नहीं लगी थी और उनका पैर नहीं टूटा था। इस दावे के समर्थन में उन्होंने बांगुर इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंस (Bangur Institute of Neurosciences) की दो मेडिकल रिपोर्ट सार्वजनिक की हैं। इस खुलासे के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है और तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, घटना के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सीटी स्कैन (HRCT Thorax) और बाएं घुटने के एनसीटी (NCCT) स्कैन किए गए थे। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि छाती या सीने के अंदरूनी हिस्से और फेफड़ों में किसी गंभीर चोट या हड्डी टूटने का कोई प्रमाण नहीं मिला है। फेफड़ों के आसपास कोई अतिरिक्त तरल पदार्थ भी नहीं जमा था। वहीं, बाएं घुटने के स्कैन में केवल उम्र से संबंधित ऑस्टियोआर्थराइटिस (हड्डियों का क्षय) पाया गया, जिसे डॉक्टरों ने चोट के बजाय उम्रजन्य प्रक्रिया बताया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि घुटने के जोड़ और आसपास के ऊतक (Soft Tissues) सामान्य स्थिति में थे। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इस पूरे मामले को लेकर अपनी ही सरकार के कार्यकाल के दौरान प्रशासनिक स्तर पर जांच के निर्देश दिए हैं। उनका आरोप है कि चुनाव से पहले राजनीतिक सहानुभूति हासिल करने के लिए चोट के मामलों को लेकर भ्रम फैलाया गया था। सुवेंदु ने मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर सवाल उठाए हैं कि जब रिपोर्ट में गंभीर चोट या फ्रैक्चर की पुष्टि नहीं हुई थी, तो इसे बड़ा मुद्दा क्यों बनाया गया। सुवेंदु अधिकारी के इस दावे के बाद टीएमसी के विधायक कुणाल घोष ने सोशल मीडिया के जरिए कड़ा विरोध दर्ज कराया है। कुणाल घोष ने इसे ‘दुर्भाग्यपूर्ण और रुचिहीन’ करार देते हुए कहा कि किसी की व्यक्तिगत मेडिकल जानकारी को सार्वजनिक करना और उस पर राजनीति करना बेहद आपत्तिजनक है। उन्होंने लिखा कि डॉक्टर और संबंधित संस्थान जानते हैं कि उस वक्त चोट कितनी गंभीर थी और आज भी ममता बनर्जी के पैर की सूजन पूरी तरह ठीक नहीं हुई है। टीएमसी ने इसे बीजेपी की राजनीतिक कुत्सा और हार के डर से उपजा प्रोपेगैंडा बताया है।भले ही यह घटना साल 2021 के विधानसभा चुनाव से जुड़ी हो, लेकिन मौजूदा राजनीतिक माहौल में इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होने से राज्य में नया विवाद छिड़ गया है। एक तरफ जहां बीजेपी इसे राजनीतिक हथकंडा बता रही है, वहीं टीएमसी इसे नेता की छवि धूमिल करने की साजिश करार दे रही है। इस विवाद के चलते आने वाले दिनों में बंगाल की सियासत में और गर्माहट देखने को मिल सकती है।
