राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 157वीं जयंती और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की 122वीं जयंती के अवसर पर देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि दी जा रही है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने भी दोनों महान नेताओं को श्रद्धांजलि अर्पित की। राष्ट्रपति मुर्मु ने गांधी जयंती की पूर्व संध्या पर देशवासियों को संदेश देते हुए कहा कि महात्मा गांधी के जीवन और आदर्शों का विश्व समुदाय में व्यापक सम्मान है। उन्होंने मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि युद्ध और संघर्ष के माहौल में गांधीजी का शांति और अहिंसा का संदेश और अधिक प्रासंगिक हो जाता है। राष्ट्रपति ने अपने संदेश में कहा कि गांधी जयंती के अवसर पर वह सभी देशवासियों की ओर से महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करती हैं। उन्होंने कहा कि गांधीजी के विचारों में शांति, अहिंसा और मानव कल्याण की भावना निहित है। राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि भारत वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के राष्ट्रीय लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस विकास यात्रा में संवेदनशीलता और समावेश के मूल्यों को प्राथमिकता देने की बात उन्होंने कही, ताकि विकास का लाभ किसी नागरिक से वंचित न रहे। राष्ट्रपति ने अपने संदेश में महात्मा गांधी के ‘सर्वोदय’ के आदर्श का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सर्वोदय में सभी के कल्याण और उत्थान की भावना निहित है। उन्होंने देशवासियों से नैतिक आचरण और सक्रिय भागीदारी के माध्यम से आत्मनिर्भर, सशक्त और विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। गांधी जयंती के अवसर पर नई दिल्ली स्थित राजघाट पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने भी बापू को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके सत्य, अहिंसा, न्याय और मानव गरिमा से जुड़े विचारों को याद किया। उपराष्ट्रपति कार्यालय की ओर से जारी संदेश में गांधीजी के जीवन और संदेश को शांति, करुणा, निस्वार्थ सेवा और सामाजिक सद्भाव की प्रेरणा बताया गया। पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर विजय घाट पर भी श्रद्धांजलि कार्यक्रम हुआ। शास्त्री जी को उनकी सादगी, ईमानदारी और राष्ट्र के प्रति समर्पण के लिए याद किया गया। ‘जय जवान, जय किसान’ का उनका आह्वान आज भी देश के सैनिकों और किसानों के योगदान को सम्मान देने वाले प्रमुख राष्ट्रीय संदेशों में शामिल है। उपराष्ट्रपति कार्यालय की ओर से जारी संदेश में शास्त्री जी के नेतृत्व, सादगी और राष्ट्रसेवा को याद किया गया। 2 अक्टूबर देश के इतिहास में दो प्रमुख राष्ट्रीय नेताओं की जयंती के कारण विशेष महत्व रखता है। एक ओर महात्मा गांधी के सत्य, अहिंसा और सर्वोदय के विचारों को याद किया जाता है, वहीं लाल बहादुर शास्त्री की सादगी, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा की विरासत को नमन किया जाता है। गांधी जयंती के अवसर पर राष्ट्रपति मुर्मु ने विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में नागरिकों की भागीदारी तथा नैतिक आचरण को महत्वपूर्ण बताया है।