पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी अनुमंडल अदालत के कोर्ट रूम नंबर 4 में बुधवार को सुनवाई के दौरान एक अप्रिय घटना सामने आई। 4थ जुडिशल मजिस्ट्रेट की अदालत में सुनवाई के दौरान एक आरोपी ने हिजाब पहनी महिला जज की पोशाक की ओर इशारा करते हुए जोर से ‘जय श्री राम’ के नारे लगा दिए। घटना के तुरंत बाद कोर्ट रूम में हंगामा और तनाव की स्थिति पैदा हो गई। हालांकि, स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आरोपी के वकील त्रिदीप साहा ने तुरंत अदालत से बिना शर्त माफी मांग ली, जिससे मामला शांत हुआ। लेकिन इस घटना के सामने आते ही वकीलों के विभिन्न संगठनों ने इसकी कड़ी निंदा की है। अदालत सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे मामले की शुरुआत साल 2018 में हुए एक अंतरधार्मिक विवाह से हुई थी। उस समय ‘लव जिहाद’ का आरोप लगाते हुए कुछ लोगों ने बाघाजतिन पार्क से हिलकार्ट रोड होते हुए सिलीगुड़ी के उप-विभागीय अधिकारी (SDO) कार्यालय तक विरोध मार्च निकाला था। इस कार्यक्रम के दौरान इलाके में तनाव पैदा हो गया था, जिसके बाद पुलिस ने वकील त्रिदीप साहा समेत 24 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इस मामले में कुछ आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी थी, जबकि बाकी आरोपियों के खिलाफ वारंट जारी होने के कारण उन्हें बुधवार को कोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया गया था। बुधवार को जब अदालत की कार्यवाही शुरू हुई, तब महिला जज कोर्ट में मौजूद आरोपियों के नाम पुकार कर उनकी उपस्थिति दर्ज कर रही थीं। नाम पुकारे जाने पर आरोपी एक-एक करके जज के सामने खड़े हो रहे थे। उसी दौरान, बेंच पर बैठी महिला जज के हिजाब को देखते हुए एक आरोपी ने अचानक ‘जय श्री राम’ का नारा लगा दिया। पल भर में ही कोर्ट रूम के भीतर अफरा-तफरी मच गई। हालांकि, आरोपी के वकील ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए स्थिति संभाली और जज से क्षमा याचना की, जिसके बाद अदालती कार्यवाही आगे बढ़ सकी। घटना के सामने आने के बाद सिलीगुड़ी बार एसोसिएशन ने इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष उदयशंकर मालाकार ने कहा कि कोर्ट रूम के अंदर ऐसा व्यवहार पूरी तरह से अस्वीकार्य है और अदालत चाहती तो अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर स्वतः संज्ञान (सुओ मोटो) मामला दर्ज कर सकती थी। ऑल इंडिया लॉयर्स एसोसिएशन के दार्जिलिंग जिला सचिव दिवाकर राय ने कहा कि अदालत राजनीति और धर्म से ऊपर निष्पक्ष न्याय का पवित्र स्थान है, जहां किसी भी प्रकार की नारेबाजी गैरकानूनी है। वहीं, पश्चिम बंगाल बार काउंसिल के सदस्य और अधिवक्ता अलकेश चक्रवर्ती ने इसे कोर्ट प्रोटोकॉल का उल्लंघन बताते हुए कहा कि किसी भी जज या याचिकाकर्ता के कपड़ों पर टिप्पणी करना अनुचित है। दूसरी तरफ, आरोपी के वकील त्रिदीप साहा ने पूरे वाकये को महज एक ‘संयोग’ करार दिया है। उन्होंने अपने मुवक्किल का बचाव करते हुए कहा कि समाज में कई लोग अभिवादन के तौर पर ‘जय श्री राम’ या ‘राधे-राधे’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। नाम पुकारे जाने के समय भ्रम की स्थिति में आरोपी ने अनजाने में यह शब्द कह दिया। यह नारा जज को निशाना बनाकर नहीं लगाया गया था। इसके बावजूद, कोर्ट की गरिमा और स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए उन्होंने तुरंत अदालत से माफी मांग ली थी।