पश्चिम बंगाल सरकार ने शराब की दुकानों के लाइसेंस नियमों में बड़े बदलाव किए हैं. बंद पड़ी दुकानों को खोलने के लिए नए इंतजाम किए गए हैं और शहरी क्षेत्रों में दूरी की सीमा बढ़ा दी गई है. सरकार ने राज्य में खुदरा शराब लाइसेंस जारी करने के नियमों में भी कई बदलाव किए हैं. राज्य सरकार ने इस संबंध में मंगलवार को दिशा-निर्देश जारी किए. दिशा-निर्देशों में यह स्पष्ट किया गया है कि नए लाइसेंस के लिए किन स्थानों को ‘नए स्थल’ और किन स्थानों को ‘मौजूदा स्थल’ माना जाएगा. विदेशी शराब (एफएल) की पुरानी दुकानों, लाइसेंस रद्द होने, वापस लेने या आत्मसमर्पण करने के कारण बंद हो चुकी शराब की दुकानों को नए लाइसेंस के तहत लाने का मार्ग प्रशस्त हो चुका है. शहरी क्षेत्रों में धार्मिक संस्थानों, शैक्षणिक संस्थानों और अस्पतालों या स्वास्थ्य केंद्रों से दूरी की सीमा 1,000 फीट (लगभग 305 मीटर) से बढ़ाकर 500 मीटर कर दी गई है. हालांकि, शहरी क्षेत्रों में यह वृद्धि केवल नए लाइसेंसों पर लागू होगी. मौजूदा दुकानें इसके दायरे में नहीं आएंगी. विदेशी शराब की दुकानों के मामले में, यह कहा गया है कि 4(H) से 4(K) श्रेणी के लाइसेंस के तहत संचालित किसी भी विदेशी शराब की दुकान को कुछ परिस्थितियों में सभी प्रकार की शराब की बिक्री के लिए 4(P) लाइसेंस के तहत उपयोग करने की अनुमति दी जा सकती है. यानी, शराब के कारोबार के लिए पहले से उपयोग किए जा रहे परिसर को एक नई श्रेणी के लाइसेंस के तहत उपयोग करने का अवसर प्रदान किया गया है. इस नियम के तहत, संशोधन से पहले प्रस्तुत किए गए आवेदनों का निपटारा भी नए नियमों के अनुसार किया जाएगा. श्रेणी 4(पी) के नए लाइसेंस जारी करने के उद्देश्य से दो और प्रकार के स्थानों को ‘मौजूदा स्थल’ माना जाएगा. प्रथम, श्रेणी 4(H) से 4(K) तक की कोई भी FL ‘चालू’ दुकान, यदि नए 4(P) लाइसेंस के तहत वहां से संचालित की जा रही है, तो उसे मौजूदा स्थल माना जाएगा. द्वितीय, कोई भी ऐसा स्थान जहां पिछले लाइसेंस के रद्द होने, वापस लेने या समर्पण के कारण शराब या किसी अन्य उत्पाद की खुदरा बिक्री बंद हो गई है, उसे भी ‘मौजूदा स्थल’ माना जाएगा. आबकारी विभाग को उम्मीद है कि इस नए नियम से इस क्षेत्र के राजस्व में वृद्धि होगी.
