अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो अपने 4 दिनों के भारत दौरे के लिए शनिवार सुबह कोलकाता पहुंचे। इस दौरान एयरपोर्ट पर विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने उनका जोरदार स्वागत किया। विदेश मंत्री बनने के बाद रुबियो की यह पहली भारत यात्रा है। इस दौरे का उद्देश्य पिछले साल के मध्य से तनावपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों को सुधारना है। अधिकारियों के अनुसार, जयशंकर और रुबियो के बीच होने वाली बातचीत में ऊर्जा, व्यापार, निवेश, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी तथा लोगों के बीच आपसी संपर्क को मजबूत करने के उपाय आदि प्रमुख मुद्दे होंगे। दोनों पक्षों के पश्चिम एशिया संकट और उसके आर्थिक प्रभावों, विशेष रूप से ऊर्जा आपूर्ति पर भी विचार-विमर्श करने की उम्मीद है। अमेरिकी विदेश मंत्री की भारत यात्रा, विदेश सचिव विक्रम मिसरी के वाशिंगटन डीसी के तीन दिवसीय दौरे के लगभग पांच सप्ताह बाद हो रही है। भारत यात्रा से पहले रुबियो ने कहा कि अमेरिका नई दिल्ली के साथ ऊर्जा संबंधों का विस्तार करना चाहता है और क्वाड के जरिए समन्वय को और मजबूत करना चाहता है। उन्होंने भारत को महान सहयोगी और महान साझेदार बताया। मियामी में पत्रकारों से बातचीत में रुबियो ने कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति संकट के बीच अमेरिका भारत को अधिक ऊर्जा निर्यात करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, ‘हम भारत को जितनी ऊर्जा चाहिए, उतनी बेचने के इच्छुक हैं। अमेरिका इस समय ऐतिहासिक स्तर पर ऊर्जा उत्पादन और निर्यात कर रहा है और हम इसे और बढ़ाना चाहते हैं।’ अमेरिकी दूतावास ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की आगामी भारत यात्रा क्वाड पार्टनरशिप के महत्व को रेखांकित करती है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, क्वाड में भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका शामिल हैं। इसका उद्देश्य वैश्विक भलाई के लिए सहयोग करना और एक स्वतंत्र, खुला, समावेशी, समृद्ध तथा लचीला इंडो-पैसिफिक क्षेत्र सुनिश्चित करना है। भारत 26 मई को नई दिल्ली में क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी करेगा। विदेश मंत्री के निमंत्रण पर मार्को रुबियो, ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वांग और जापान के विदेश मंत्री तोसीमित्सु मोतेगी बैठक में शामिल होने के लिए भारत आएंगे।