सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी हलफनामों में गलत जानकारी देने या महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने के मामलों में आम नागरिकों के अधिकारों को लेकर अहम फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि निर्वाचित उम्मीदवार के खिलाफ जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 125A के तहत आम नागरिक भी आपराधिक शिकायत दर्ज करा सकता है। ऐसी शिकायत को केवल इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता कि उसे चुनाव आयोग या किसी अधिकृत सरकारी अधिकारी ने दाखिल नहीं किया है। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने कहा कि चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी देने या महत्वपूर्ण तथ्य छिपाने के आरोपों में निजी शिकायत पर कानूनी विचार किया जा सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 195 की पाबंदी इस तरह की शिकायतों को स्वतः रोकने का आधार नहीं बनती। इस फैसले का महत्व इसलिए है क्योंकि इससे चुनावी हलफनामों में दी गई जानकारी को लेकर नागरिकों की ओर से शिकायत दर्ज कराने के कानूनी रास्ते की स्थिति स्पष्ट होती है। हालांकि, शिकायत दर्ज होने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित उम्मीदवार को दोषी मान लिया गया है। आरोपों की जांच और कानूनी प्रक्रिया के तहत उनका परीक्षण जरूरी होगा। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि किसी निर्वाचित उम्मीदवार को परेशान करने के इरादे से झूठी या निराधार शिकायत दर्ज कराई जाती है, तो सक्षम मजिस्ट्रेट मामले के तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर उचित कार्रवाई कर सकते हैं। इस टिप्पणी से अदालत ने शिकायत दर्ज कराने के अधिकार के साथ उसके जिम्मेदारी से इस्तेमाल की जरूरत पर भी जोर दिया। यानी नागरिक शिकायत कर सकते हैं, लेकिन जानबूझकर गलत आरोप लगाने पर कानूनी परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। यह मामला कर्नाटक निवासी राजकुमार माडकी की अपील से जुड़ा था। उन्होंने आरोप लगाया था कि बीदर विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित विधायक शैलेंद्र बेलदाले ने वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के नामांकन के साथ दाखिल हलफनामे में अपने आवासीय पते के बारे में गलत जानकारी दी थी।माडकी ने इस संबंध में बेंगलुरु की अदालत में आपराधिक शिकायत दर्ज कराई थी। हालांकि, कर्नाटक हाईकोर्ट ने 7 मार्च 2025 को शिकायत खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट का कहना था कि इस तरह की कार्रवाई चुनाव आयोग की शिकायत पर ही शुरू की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने कानूनी सवाल पर निजी शिकायतों को वैध मानते हुए हाईकोर्ट की व्याख्या से असहमति जताई। हालांकि, पीठ ने विधायक शैलेंद्र बेलदाले के खिलाफ पहले खारिज की जा चुकी कार्यवाही को दोबारा शुरू करने का आदेश नहीं दिया। इस तरह फैसले ने चुनावी हलफनामों में कथित गलत जानकारी के मामलों में आम नागरिकों की शिकायत दर्ज कराने की पात्रता को स्पष्ट किया है। यह निर्णय चुनावी पारदर्शिता और उम्मीदवारों की ओर से दाखिल जानकारी की जवाबदेही से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
