पश्चिम बंगाल के मालदा में जिला परिषद के सभाधिपति और सह-सभाधिपति के चुनाव से ठीक पहले राजनीतिक माहौल गरमा गया है। सोमवार देर रात मालदा टाउन स्टेशन पर ट्रेन से उतरते ही तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस खेमे से जुड़े करीब तीन जिला परिषद सदस्यों को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने का आरोप लगा है। घटना के बाद स्टेशन परिसर में भी काफी देर तक तनाव की स्थिति बनी रही। बताया जा रहा है कि जिला परिषद के सभाधिपति और सह-सभाधिपति के चुनाव को देखते हुए संबंधित सदस्य पिछले करीब एक महीने से झारखंड के एक इलाके में ठहरे हुए थे। मंगलवार को होने वाले चुनाव से पहले सोमवार रात वे ट्रेन के जरिए मालदा लौटे थे। आरोप है कि मालदा टाउन स्टेशन पर ट्रेन से उतरने के बाद पुलिस ने इनमें से तीन सदस्यों को हिरासत में ले लिया। जिला परिषद के शीर्ष दो पदों के चुनाव से महज कुछ घंटे पहले हुई इस कार्रवाई ने राजनीतिक समीकरण को लेकर चर्चाएं तेज कर दी हैं। हिरासत में लिए गए सदस्यों की मौजूदगी चुनाव के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही थी। ऐसे में मतदान से पहले उनकी हिरासत को लेकर कांग्रेस और तृणमूल समर्थक खेमे ने सवाल उठाए हैं। दक्षिण मालदा से कांग्रेस सांसद ईशा खान चौधरी और कांग्रेस नेता मौसम बेनजीर नूर ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि जिला परिषद में भाजपा के पास बहुमत नहीं होने के कारण राजनीतिक समीकरण बदलने के लिए पुलिस का इस्तेमाल किया जा रहा है। कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि उनके समर्थन वाले सदस्यों को कथित तौर पर झूठे मामलों में फंसाकर हिरासत में लिया गया है। कांग्रेस नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश बताते हुए कहा कि जनता इसका जवाब देगी। हालांकि, ये आरोप कांग्रेस नेताओं की ओर से लगाए गए हैं और पुलिस की ओर से हिरासत के कारणों तथा संबंधित मामलों को लेकर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है। मालदा जिला परिषद में कुल 43 सीटें हैं। वर्ष 2023 के पंचायत चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने 34 सीटों पर जीत दर्ज कर बहुमत हासिल किया था, जबकि कांग्रेस के खाते में पांच और भाजपा के पास चार सीटें थीं। बाद में जिला परिषद के भीतर राजनीतिक समीकरण में बदलाव देखने को मिला। मौजूदा घटनाक्रम में तृणमूल कांग्रेस के एक धड़े के 19 सदस्यों और कांग्रेस के पांच सदस्यों के समर्थन से जिला परिषद के सभाधिपति और सह-सभाधिपति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाए जाने की बात सामने आई है। इसी वजह से मंगलवार का चुनाव राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। एक तरफ जिला परिषद में सत्ता के समीकरण को लेकर खींचतान जारी है, तो दूसरी ओर चुनाव से ठीक पहले तीन सदस्यों की हिरासत ने पूरे मामले को और पेचीदा बना दिया है। अब सवाल यह है कि हिरासत में लिए गए सदस्य चुनाव प्रक्रिया में शामिल हो पाएंगे या नहीं और उनकी अनुपस्थिति का जिला परिषद के शक्ति संतुलन पर क्या असर पड़ेगा। कांग्रेस नेतृत्व ने पुलिस प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि विरोधी खेमे के सदस्यों पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने भी मंगलवार को मामले को लेकर बयान जारी किया और आरोप लगाया कि भाजपा विरोधी नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस के जरिए परेशान किया जा रहा है। फिलहाल, जिला परिषद के सभापति और सह-सभापति का चुनाव मंगलवार को होना है। चुनाव से ठीक पहले सामने आए इस घटनाक्रम के बाद सभी की नजर अब चुनाव प्रक्रिया और जिला परिषद के बदलते राजनीतिक समीकरण पर है।
