तृणमूल कांग्रेस (TMC) की कृष्णनगर से सांसद महुआ मोइत्रा ने दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने पहुंचकर पुलिस के समक्ष एक लिखित शिकायत (Complaint) दर्ज कराई है। यह कदम हाल ही में सामने आई एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए उठाया गया है, जिसमें दावा किया गया था कि पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के 14 नीतिगत फैसलों पर आंतरिक स्तर पर अलग-अलग राय देखने को मिली थी। अपनी शिकायत में उन्होंने आयोग के हालिया प्रशासनिक और नीतिगत निर्णयों की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। थाने में आधिकारिक लिखित शिकायत सौंपने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए महुआ मोइत्रा ने चुनाव आयोग के कामकाज और प्रक्रियाओं से जुड़ी तीन प्रमुख बातें रेखांकित कीं:

1. ‘फॉर्म-६’ की प्रक्रिया पर सवाल: नए मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले ‘फॉर्म-6’ में जोड़े गए एक नए सवाल को लेकर आपत्ति जताई गई है। इसमें आवेदकों से उनके माता-पिता या दादा-दादी के 2002 की मतदाता सूची में नाम होने से जुड़ा विवरण मांगा जा रहा है।

2. याचिकाओं को लेकर प्रक्रियात्मक मुद्दा: पश्चिम बंगाल के लगभग 33 लाख मतदाताओं से संबंधित मामलों में चुनाव आयोग द्वारा दायर अपीलों और मुकदमों के प्रशासनिक निर्णय को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

3. डिजिटल सिस्टम और वोटर लिस्ट संशोधन: शिकायत में यह बात भी उठाई गई है कि बूथ स्तर के अधिकारियों (ERO) द्वारा दस्तावेजों के भौतिक सत्यापन के बाद प्रणालीगत स्तर पर नामों के संशोधन या हटाए जाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती जानी चाहिए। 2023 में केंद्र सरकार द्वारा चुनाव आयुक्तों को प्रदान किए गए कानूनी सुरक्षा कवच (Legal Immunity) का जिक्र करते हुए महुआ मोइत्रा ने अपना दृष्टिकोण स्पष्ट किया।उन्होंने तर्क दिया कि कानूनी सुरक्षा केवल आयोग के संयुक्त, सामूहिक और नियमों के तहत लिए गए आधिकारिक निर्णयों पर ही प्रभावी होती है। यदि आयोग के भीतर की स्थापित व्यवस्था या कानूनी नियमों को दरकिनार कर कोई प्रक्रियात्मक निर्णय लिया जाता है, तो उस पर सवाल उठाए जा सकते हैं। उन्होंने इन मामलों की निष्पक्ष जांच और उचित कानूनी समीक्षा की मांग की है।