पितृपक्ष के समापन और देवीपक्ष की शुरुआत के संधिकाल यानी ‘महालया’ (Mahalaya 2026) के अवसर पर पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए किए जाने वाले ‘तर्पण’ को लेकर गंगा के घाटों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। शुक्रवार तड़के से ही कोलकाता, हावड़ा, हुगली, उत्तर 24 परगना और नदिया जिलों में गंगा घाटों पर लाखों श्रद्धालुओं की उमड़ने वाली भीड़ को नियंत्रित करने और किसी भी हादसे को रोकने के लिए प्रशासन ने व्यापक तैयारी की है। दुर्घटनाओं को रोकने के लिए इस बार पानी के भीतर ‘फ्लोटिंग बैरिकेड्स’ (Floating Barricades) लगाए गए हैं, वहीं कोलकाता और हावड़ा पुलिस कमिश्नरेट द्वारा संयुक्त रूप से विशेष कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रमुख घाटों पर राज्य आपदा प्रबंधन बल (SDRF), सिविल डिफेंस के स्वयंसेवक और प्रशिक्षित गोताखोर तैनात किए गए हैं।
- जलीय गश्त: लाइफ जैकेट, लाइफ ब्वॉय, रस्सियों और रेस्क्यू उपकरणों से लैस मोटरचालित नौकाएं घाटों के आसपास जलक्षेत्र में लगातार गश्त करेंगी।
- नियंत्रण कक्ष: नबन्ना (राज्य सचिवालय) स्थित आपातकालीन सेवा केंद्र और पुलिस कमिश्नरेट के कंट्रोल रूम से घाटों पर तैनात नोडल अधिकारी लगातार संपर्क में रहेंगे।
तर्पण के लिए आने वाले श्रद्धालुओं, विशेषकर महिला श्रद्धालुओं की सुविधा और स्वच्छता का पूरा ध्यान रखा गया है।
- सफाई व्यवस्था: तर्पण शुरू होने से लेकर समाप्त होने तक घाटों, सीढ़ियों और पानी में जमा कचरे (फूल, गाद व पत्तों) को साफ करने के लिए अतिरिक्त सफाई कर्मचारी तैनात रहेंगे।
- सुविधाएं: सभी प्रमुख घाटों पर बायो-टॉयलेट, महिलाओं के लिए कपड़े बदलने के कमरे (Changing Rooms) और कचरा पात्र अनिवार्य किए गए हैं।
- रोशनी व पार्किंग: तड़के अंधेरे के दौरान घाटों की सीढ़ियों, पहुंच मार्गों और पार्किंग स्थलों पर पर्याप्त लाइटों का प्रबंध किया गया है।
कोलकाता नगर निगम (KMC) और हावड़ा नगर निगम के क्षेत्राधिकार में आने वाले सभी प्रमुख घाटों पर प्राथमिक उपचार के लिए अस्थायी मेडिकल कैंप लगाए गए हैं। आपातकालीन स्थिति में तुरंत अस्पताल पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस भी तैनात रहेंगी।
