कोलकाता के डीसीपी शांतनु सिन्हा विश्वास के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी कर दिया गया है. ईडी ने लुक आउट नोटिस जारी करवाया है. शांतनु के देश छोड़कर भागने की आशंका है. उनका नाम सोना पप्पू केस में मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा हुआ है. पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के अगले ही दिन बड़े बदलाव होते नज़र आ रहे हैं। कोलकाता के DCP शांतनु सिन्हा विश्वास के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया है। DCP शांतनु के खिलाफ ED ने ये लुकआउट नोटिस जारी करवाया है। ईडी ने ये कार्रवाई सोना पप्पू केस से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई है। DCP शांतनु सिन्हा को इससे पहले 5 बार पेश होने का नोटिस भेजा गया था। लेकिन आरोप है कि वे एक बार भी पेश नहीं हुए। दरअसल, ईडी को आशंका थी कि DCP शांतनु देश छोड़कर भागने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में ED ने DCP शांतनु के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी करवा दिया है। ED ने पिछले महीने शांतनु सिन्हा बिस्वास के घर और उनके कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। ईडी ने शांतनु के गोलपार्क स्थित आवास पर भी छापा मारा था। जानकारी के मुताबिक, पीएमएलए के तहत ईडी कोलकाता में कई ठिकानों पर छापेमारी कर रही थी। अधिकारियों ने बताया कि यह छापेमारी दक्षिण कोलकाता के बालीगंज इलाके में ‘सोना पप्पू सिंडिकेट’ मामले के हुई। बिस्वास एक समय कालीघाट पुलिस स्टेशन के इंचार्ज थे। यह थाना भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। ममता ने यहां से चुनाव लड़ा था, जहां उन्हें हार का सामना करना पड़ा। आरोपी सोना पप्पू सोना एक रियल एस्टेट डेवलपर और हिस्ट्रीशीटर है। उस पर हत्या के प्रयास, जबरन वसूली और आर्म्स एक्ट के तहत 15 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। ED ने अप्रैल 2026 में कोलकाता के आनंदपुर, अलीपुर और अन्य इलाकों में सोना पप्पू के सहयोगियों और व्यापारियों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। आरोप है कि सोना पप्पू ने फ्लैट देने के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये लिए और उन्हें न तो फ्लैट मिले और न ही पैसे वापस हुए. इस मामले में PMLA के तहत ED कार्रवाई कर रही है। फरवरी में, गोलपार्क इलाके की कंकुलिया रोड पर दो गुटों के बीच झड़प हुई थी, जिसमें बम फेंके गए, गोलियां चलाई गईं और पत्थर बरसाए गए। इस घटना के बाद 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया। निवासियों के अनुसार, सोनू पप्पू के नेतृत्व में 100 से ज़्यादा युवकों ने एक निवासी बप्पी हलदर और उसके समर्थकों पर धावा बोलकर हमला कर दिया. जवाब में बप्पी और उसके समर्थकों ने भी पलटवार किया। स्थानीय लोगों का दावा है कि पप्पू ने इस इलाके पर अपना दबदबा कायम करने के मकसद से ही इस हिंसा की साज़िश रची थी। साल 2010-11 के आस-पास कंस्ट्रक्शन के धंधे में कदम रखने के बाद से ही पप्पू का कानून से कई बार आमना-सामना हो चुका है।