ईवीएम (EVM) की विश्वसनीयता, मतदाता सूचियों में कथित हेराफेरी और चुनावी गड़बड़ियों के मुद्दे पर विपक्षी ‘INDIA’ गठबंधन ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ बड़े आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने आगामी रविवार, 1 नवंबर को दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में आयोजित होने वाली गठबंधन की महारैली को लेकर देशवासियों से एकजुट होने की अपील की है। दोपहर 12:30 बजे प्रस्तावित इस विशाल रैली को लेकर उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि “जब मतदान का अधिकार खतरे में हो, तो खामोश रहना कोई विकल्प नहीं हो सकता”। सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में ममता बनर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल और देश के विभिन्न राज्यों में हुई कथित ‘वोट लूट’ पर अब जवाबदेही तय होनी चाहिए, चुप्पी नहीं। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल किसी राजनीतिक दल की सत्ता की नहीं, बल्कि प्रत्येक भारतीय नागरिक के चुनने के संवैधानिक अधिकार और लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई है।
विपक्षी गठबंधन ने इस रैली के मुख्य एजेंडे के रूप में चार प्रमुख बिंदुओं को रेखांकित किया है:
- ईवीएम की निष्पक्ष जांच (EVMs under scrutiny)
- वोटर डेटा पर उठ रहे सवाल (Voter data under question)
- मतदाता सूची में विसंगतियां व संदेह (Electoral rolls under suspicion)
- मतगणना प्रक्रिया की पारदर्शिता को चुनौती (Counting under challenge)
ममता बनर्जी ने देश के छात्रों, युवाओं, महिलाओं, श्रमिकों और नागरिक समाज (Civil Society) से अपील की कि वे इस लोकतांत्रिक संघर्ष में शामिल होने के लिए रामलीला मैदान पहुंचें। उन्होंने कहा, “आइए, हम सब मिलकर अपने लोकतंत्र की रक्षा (Defend our Democracy) और संविधान को बचाने (Save our Constitution) के लिए एकजुट होकर खड़े हों।” गौरतलब है कि हाल ही में दिल्ली के व्यापारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने भी त्योहारों के समय को देखते हुए रैली की तारीख व समय के संदर्भ में नेताओं से संवाद किया था। हालांकि, विपक्षी खेमे ने चुनावी पारदर्शिता और लोकतंत्र के बुनियादी सिद्धांतों की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए 1 नवंबर की तारीख तय रखी है। 1 नवंबर को होने वाली इस रैली में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, सपा, आप, वाममोर्चा सहित INDIA गठबंधन के तमाम घटक दलों के शीर्ष नेता एक मंच पर मौजूद रहेंगे। चुनाव प्रक्रिया में सुधार, मतपत्रों (Paper Ballot) के विकल्प पर पुनर्विचार और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर विपक्षी नेता साझा घोषणापत्र और रणनीति भी पेश कर सकते हैं।
