दुर्गा पूजा 2026 (Durga Puja 2026) से ठीक पहले पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य की पूजा कमिटियों के लिए एक बड़ी प्रोत्साहन योजना का ऐलान किया है। गुरुवार को आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में राज्य की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने जानकारी दी कि सरकार इस बार से ‘ग्रीन दुर्गा पूजा एक्सीलेंस अवॉर्ड’ (Green Durga Puja Excellence Award) की शुरुआत करने जा रही है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य पूजा के दौरान पर्यावरण सुरक्षा, ठोस कचरा प्रबंधन और सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा देना है। पर्यावरण-अनुकूल (Eco-friendly) तौर-तरीकों को अपनाने वाली शीर्ष पूजा कमिटियों को राज्य स्तर पर प्रथम पुरस्कार के रूप में 1 लाख रुपये की नकद राशि प्रदान की जाएगी। राज्य सरकार की इस नई नीति के तहत पुरस्कारों को चार अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया गया है:
श्रेष्ठ ग्रीन दुर्गा पूजा: पर्यावरण-अनुकूल सामग्रियों से पंडाल निर्माण और प्रकृति संरक्षण के प्रयासों के लिए।
श्रेष्ठ स्वच्छ एवं वेस्ट-स्मार्ट पूजा: पंडाल परिसर में बेहतर कचरा प्रबंधन और स्वच्छता बनाए रखने के लिए।
श्रेष्ठ जागरूकता पहल: सामाजिक मुद्दों और पर्यावरण संरक्षण पर जन-जागरूकता फैलाने के लिए।
कमी्युनिटी एंगेजमेंट अवॉर्ड: स्थानीय निवासियों की भागीदारी और सामाजिक कल्याणकारी गतिविधियों के संचालन के लिए।
राज्य और जिला स्तर पर मिलेगी इनामी राशि
मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने पुरस्कार राशि का ब्योरा देते हुए बताया कि राज्य स्तर पर शीर्ष तीन विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा।
पहला पुरस्कार: ₹1,00,000 (एक लाख रुपये)
दूसरा पुरस्कार: ₹80,000 (अस्सी हजार रुपये)
तीसरा पुरस्कार: ₹50,000 (पचास हजार रुपये)
इसके अलावा, राज्य के सभी जिलों से चयनित सर्वश्रेष्ठ पूजा कमिटियों को भी जिला स्तर पर 25,000 रुपये प्रति कमिटी प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
इस पुरस्कार प्रतियोगिता में भाग लेने की प्रक्रिया को पारदर्शी और सुलभ बनाने के लिए सरकार ने एक नया डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘ग्रीन दुर्गा पूजा इवैल्यूएशन ऐप’ (Green Durga Puja Evaluation App) भी लॉन्च किया है। इच्छुक पूजा कमिटियां इस ऐप के माध्यम से अपना ऑनलाइन पंजीकरण करा सकती हैं।संवाददाता सम्मेलन के दौरान मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल पुरस्कार देना ही उद्देश्य नहीं है, बल्कि पूजा मंडपों में विशेष स्टॉल लगाकर दर्शनार्थियों के बीच पौधे (चूड़ा/पौध) वितरित करने के लिए भी कमिटियों को प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि उत्सव के साथ-साथ हरित संदेश भी घर-घर तक पहुंचे।
