पश्चिम बंगाल में सत्ता बदलने के बाद पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार के मंत्रियों और उनके करीबियों के रसूख का किला एक-एक कर ढहता जा रहा है. अब राज्य की सबसे बड़ी आस्था यानी कोलकाता की दुर्गा पूजा को भी सिंडिकेट और वित्तीय अनियमितताओं के खेल में घसीटने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है. राज्य के पूर्व पर्यटन और सांस्कृतिक मामलों के मंत्री इंद्रनील सेन (Indranil Sen) और उनकी पत्नी मधुछंदा सेन के खिलाफ कोलकाता पुलिस में एक लिखित शिकायत दर्ज करायी गयी है. इंद्रनील सेन और मधुचंदा सेन के अलावा, चार्जशीट में ‘मास आर्ट’ और ताला प्रत्य के मास्टरमाइंड ध्रुबज्योति बसु उर्फ शुवो, सायंतन मैत्रा और राजन चटर्जी का भी नाम है। उन पर आरोप है कि उन्होंने यूनेस्को (UNESCO) का ‘फर्जी आधिकारिक पार्टनर’ होने का ढोंग रचा और कोलकाता की प्रसिद्ध दुर्गा पूजा के नाम पर प्रिव्यू शो (Preview Show) का एक बड़ा रैकेट चलाकर आम जनता और विदेशी पर्यटकों से करोड़ों रुपए की ठगी की. आरोप है कि बंगाल की ममता बनर्जी सरकार के संरक्षण में चल रहे इस कथित वीआईपी पास सिंडिकेट ने कोलकाता की सार्वजनिक दुर्गा पूजा को आम जनता के लिए प्रतिबंधित कर निजी व्यावसायिक जोन में तब्दील कर दिया. कोलकाता पुलिस कमिश्नर, राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) और बहूबाजार थाने में यह शिकायत कोलकाता के ही एक अंतरराष्ट्रीय ट्रैवल कंसल्टेंट जयदीप मुखर्जी ने दर्ज करायी है. इसमें कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं.
बेचे गये वीआईपी टिकट और पास : इस संस्था ने कोलकाता की 24 चुनिंदा सबसे बड़ी और प्रसिद्ध दुर्गा पूजा कमेटियों के पंडालों में आम जनता की एंट्री से पहले ‘प्रिव्यू शो’ दिखाने के नाम पर 4,000 रुपए प्रति व्यक्ति के हिसाब से वीआईपी टिकट और पास बेचे.
फर्जी संस्था का गठन : पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन, उनकी पत्नी मधुछंदा सेन, ध्रुवज्योति बोस, सायंतन मैत्रा और रंजना चटर्जी ने मिलकर 24 जून 2022 को ‘महानिर्वाण रोड मास आर्ट सोसाइटी’ (MassArt) नाम से एक संस्था रजिस्टर्ड करायी थी.
यूनेस्को के नाम का गलत इस्तेमाल : इस संस्था ने खुद को यूनेस्को का आधिकारिक सहयोगी बताया, जबकि वास्तव में उनका यूनेस्को से ऐसा कोई सीधा व्यावसायिक नाता नहीं था.
शिकायतकर्ता जयदीप मुखर्जी, जो खुद वर्ष 2010 से विदेशों में बंगाल की दुर्गा पूजा को प्रमोट कर रहे हैं और यूरोप व अमेरिका में 66 से अधिक रोड शो कर चुके हैं, उन्होंने इस खेल को उजागर किया है.
- जयदीप का आरोप है कि इस 4,000 रुपए वाले वीआईपी टिकट रैकेट के कारण कोलकाता के भव्य पूजा पंडालों को आम लोगों के लिए बंद कर दिया जाता था. वहां केवल महंगे टिकट धारकों को ही विशेष एंट्री दी जाती थी, जिससे कई पंडालों के बाहर स्थानीय लोगों और सुरक्षाकर्मियों के बीच भारी विवाद और तनाव की स्थिति पैदा होती थी.
- शिकायत में कहा गया है कि यूनेस्को की कोई भी आधिकारिक टीम इन प्रिव्यू शो में शामिल होने कभी नहीं आई. यह सब केवल पैसे ऐंठने का एक सिंडिकेट था, जिसे पूर्ववर्ती तृणमूल सरकार का पूरा प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त था. रसूखदार होने के कारण तब उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो सकी थी.
- मास आर्ट सोसाइटी (MassArt) के ध्रुवज्योति बोस ने आरोपों को राजनीति से प्रेरित और बेबुनियाद बताया है. उनका कहना है कि उनके पास यूनेस्को की भागीदारी और पूजा कमेटियों व स्थानीय कलाकारों को दी गयी वित्तीय सहायता के सभी कागजात हैं.
- ध्रुवज्योति का दावा है कि उत्सव से पहले 4 दिनों के इस विशेष प्रिव्यू शो के दौरान संयुक्त राष्ट्र (UN) के प्रतिनिधियों ने कोलकाता के दर्जनों सामुदायिक पूजा पंडालों का दौरा किया था. ये आरोप केवल संस्था की छवि खराब करने के लिए लगाए जा रहे हैं.
बहूबाजार थाना की पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मामले की प्राथमिक जांच शुरू कर दी है. यह पता करने की कोशिश की जा रही है कि प्रिव्यू शो के टिकटों से जुटाये गये करोड़ों रुपए आखिर किस-किस खाते में ट्रांसफर किये गये. इस हाई-प्रोफाइल मामले ने बंगाल के सांस्कृतिक और राजनीतिक गलियारों में एक नया भूचाल ला दिया है.
