पश्चिम बंगाल में कैमक स्ट्रीट स्थित कार्यालय से साइनबोर्ड हटाने को लेकर जारी विवाद में तृणमूल कांग्रेस के सांसद और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। शेक्सपीयर सरणी थाने की पुलिस ने रविवार को एक बार फिर उनके आवास पर पहुंचकर नोटिस सौंपा। नोटिस में उन्हें सोमवार, 12 अक्टूबर को थाने में उपस्थित होकर अपना बयान दर्ज कराने का निर्देश दिया गया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली से लौटने के तुरंत बाद सांसद को नोटिस दिया गया। यह मामला कोलकाता नगर निगम की शिकायत से जुड़ा है, जिसके आधार पर पुलिस जांच कर रही है। पुलिस अब इस पूरे घटनाक्रम में अभिषेक बनर्जी का पक्ष जानना चाहती है। हालांकि, इस मामले में उनकी ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। शेक्सपीयर सरणी थाने की पुलिस टीम रविवार को अभिषेक बनर्जी के आवास पर नोटिस देने पहुंची थी। पुलिस सूत्रों के अनुसार, टीम को मुख्य दरवाजा खुलने से पहले करीब 20 मिनट तक इंतजार करना पड़ा। इसके बाद पुलिस ने नोटिस की प्रति सौंपकर उन्हें सोमवार को थाने में उपस्थित होने का निर्देश दिया। गौरतलब है कि इससे दो दिन पहले भी पुलिस की एक टीम उनके आवास पर पहुंची थी। हालांकि, उस समय घर पर किसी के मौजूद नहीं होने के कारण पुलिस नोटिस सौंपे बिना ही लौट गई थी। रविवार को दोबारा पहुंची टीम ने औपचारिक रूप से नोटिस सौंप दिया। अब पुलिस उनके थाने पहुंचने और बयान दर्ज किए जाने का इंतजार कर रही है। पूरा मामला 27 अगस्त को कोलकाता के कैमक स्ट्रीट स्थित अभिषेक बनर्जी के कार्यालय से एक साइनबोर्ड हटाने की कोशिश से जुड़ा है। जानकारी के मुताबिक, नगर निगम के कर्मचारी कार्यालय के बाहर लगे साइनबोर्ड को हटाने पहुंचे थे। आरोप है कि इस दौरान कर्मचारियों को अपना काम करने से रोका गया। घटना के बाद नगर निगम की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई, जिसके आधार पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। अब पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटनास्थल पर वास्तव में क्या हुआ था और साइनबोर्ड हटाने के दौरान किन परिस्थितियों में विवाद पैदा हुआ। इसी सिलसिले में अभिषेक बनर्जी को दोबारा नोटिस जारी कर बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया गया है। इस प्रकरण में कोलकाता नगर निगम की ओर से अभिषेक बनर्जी के खिलाफ तीन मामले दर्ज कराए जाने की बात सामने आई है। पुलिस इन शिकायतों के आधार पर अलग-अलग पहलुओं की जांच कर रही है। मामले में आरोपों की प्रकृति, घटनास्थल पर मौजूद लोगों की भूमिका और निगम कर्मचारियों के काम में कथित बाधा डालने से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जा रही है। पुलिस का उद्देश्य संबंधित पक्षों के बयान दर्ज कर घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ना है। हालांकि, किसी भी आरोप को अभी सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता है। जांच पूरी होने के बाद ही मामले से जुड़ी स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल, पुलिस की अगली कार्रवाई अभिषेक बनर्जी के बयान और जांच में सामने आने वाले तथ्यों पर निर्भर करेगी। कैमक स्ट्रीट विवाद से जुड़े घटनाक्रम के बीच अभिषेक बनर्जी से नगर निगम की ओर से दर्ज एक अन्य मामले में पहले भी पूछताछ की जा चुकी है। रिपोर्ट के मुताबिक, उस दौरान उनसे करीब पांच घंटे तक सवाल-जवाब किए गए थे। मौजूदा मामले में पुलिस एक बार फिर उनका बयान दर्ज करना चाहती है, ताकि शिकायत में लगाए गए आरोपों के संबंध में उनका पक्ष सामने आ सके। पुलिस जांच में केवल शिकायत ही नहीं, बल्कि घटना से जुड़े अन्य तथ्यों और संबंधित लोगों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। इस मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर की जाएगी। सोमवार को थाने में उनकी संभावित पेशी पर भी नजर बनी हुई है। इस मामले से जुड़ी शिकायतों में अभिषेक बनर्जी के अलावा पूर्व आईपीएस अधिकारी हुमायूं कबीर और बैश्वनर चट्टोपाध्याय समेत तृणमूल कांग्रेस के कई नेताओं के नाम शामिल होने की बात सामने आई है। ऐसे में पुलिस की जांच का दायरा केवल साइनबोर्ड हटाने की घटना तक सीमित नहीं, बल्कि उससे जुड़े कथित घटनाक्रम और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की पड़ताल तक फैला हुआ है। हालांकि, किसी व्यक्ति का शिकायत में नाम होना अपने आप में उसके खिलाफ आरोप साबित नहीं करता। पुलिस को जांच के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित पक्षों के बयानों के आधार पर आगे बढ़ना होगा। फिलहाल, अभिषेक बनर्जी को जारी ताजा नोटिस इस मामले में एक अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। अब देखना होगा कि उनके बयान के बाद जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है।