पिछले साल दिल्ली पुलिस ने दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में गैर-कानूनी तरीके से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों को ट्रैक करके उन्हें पद्मा पार भेजने के लिए एक खास ऑपरेशन चलाया था। केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर चलाए गए इस ऑपरेशन में दिल्ली पुलिस ने एक साल के अंदर दिल्ली से 22,000 गैर-कानूनी तरीके से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों को उनके देश वापस भेजा है। दिल्ली पुलिस ने इस बात की भी ज़ोरदार जांच शुरू कर दी है कि ये बांग्लादेशी भारत में कैसे घुसे और क्या उनकी घुसपैठ के पीछे कोई इंटरनेशनल सिंडिकेट था। इस बार गृह मंत्रालय ने मामले की जांच उनसे लेकर नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) को सौंप दी है। NIA सूत्रों का दावा है कि उनके पास इस बात के पक्के सबूत हैं कि ये बांग्लादेशी पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में एक्टिव एक इंटरनेशनल सिंडिकेट के ज़रिए भारत में घुसे थे। सरकारी सूत्रों का दावा है कि NIA के जांचकर्ता इस गैंग के सरगनाओं का पता लगाने के लिए पश्चिम बंगाल समेत बांग्लादेश की सीमा से लगे राज्यों का भी दौरा करेंगे। यह खास बात है कि बांग्लादेशी नागरिकों के भारत में घुसने और सालों तक वहां रहने और नकली सरकारी पहचान पत्र बनाने के ‘गैर-कानूनी’ तरीके का खुलासा करते हुए, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में खड़े होकर पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल के सक्रिय समर्थन के कारण सबसे ज़्यादा बांग्लादेशी घुसपैठ पश्चिम बंगाल से हुई। जवाब में, तृणमूल के अखिल भारतीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने सीधे सवाल किया कि देश के अलग-अलग हिस्सों की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत BSF की है। फिर वे इस घुसपैठ को रोकने में नाकाम क्यों रहे हैं? क्या केंद्रीय गृह मंत्री खुद इसकी ज़िम्मेदारी लेंगे? इस माहौल में, यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि बांग्लादेशी घुसपैठ मामले की जांच NIA को सौंप दी गई है। और कुछ ही महीनों में बांग्लादेश की सीमा से लगे दो राज्यों पश्चिम बंगाल और असम में विधानसभा चुनाव होने हैं। माना जा रहा है कि बांग्लादेशी घुसपैठ में शामिल सिंडिकेट की जांच के लिए NIA को नियुक्त किए जाने से राजनीतिक तनाव बढ़ सकता है।