लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी चार दिन के दौरे पर वियतनाम रवाना हो गए हैं। उनका यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब त्योहारों के सप्ताह को देखते हुए विपक्षी आईएनडीआईए गठबंधन ने दिल्ली में अपने विरोध प्रदर्शन के कार्यक्रम को फिलहाल रोक दिया है। पिछले दो सप्ताह से राहुल गांधी राजधानी में विपक्षी प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और वोट चोरी के आरोपों को लेकर केंद्र सरकार तथा चुनाव आयोग पर निशाना साधा था। पार्टी नेताओं के मुताबिक, राहुल गांधी चार दिनों तक विदेश में रहेंगे। इससे पहले वह रविवार को गोवा में कांग्रेस की गॉय रक्षण यात्रा में शामिल हुए थे। गोवा में पार्टी के कार्यक्रम में भाग लेने के बाद उनके वियतनाम रवाना होने की जानकारी सामने आई है। राहुल गांधी पिछले दो सप्ताह से दिल्ली में विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। आईएनडीआईए गठबंधन के इन प्रदर्शनों में कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के कई नेता और सांसद शामिल हुए थे। विपक्ष का मुख्य जोर मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़े सवालों पर रहा है। त्योहारों के सप्ताह को ध्यान में रखते हुए प्रदर्शनों को फिलहाल स्थगित करने का निर्णय लिया गया। इस बीच राहुल गांधी का विदेश दौरा चर्चा का विषय बन गया है। राहुल गांधी की विदेश यात्रा पर भाजपा नेता शाजिया इल्मी ने तंज कसा है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी से अब और बर्दाश्त नहीं हुआ। आखिर वे कितनी मेहनत कर सकते हैं। वोट चोरी का मुद्दा तो बस एक बहाना है। सब जानते हैं कि वे कितने आलसी हैं। अब उनका पर्यटन फिर से शुरू हो गया है। हम देख सकते हैं कि वे दो हफ्ते भी काम नहीं कर पाए और फिर से निकल पड़े। इस बार वे वियतनाम की यात्रा पर गए हैं। शाजिया इल्मी के इस बयान ने राजनीतिक चर्चा को तीखा बना दिया है। भाजपा ने राहुल गांधी की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि राहुल गांधी ऐसा पहली बार नहीं कर रहे हैं। वे अक्सर विदेश यात्राओं में ही ज्यादा समय बिताते हैं। उनका बस यही काम है कि भारत आएं, किसी मुद्दे पर विवाद खड़ा करें और फिर विदेश यात्रा पर निकल जाएं। वे विदेश में कहां जाते हैं और किससे मिलते हैं, यह किसी को समझ नहीं आता और न ही किसी को पता है। राहुल गांधी को देश को बताना चाहिए कि पिछले दो-तीन सालों में उन्होंने कहां-कहां की विदेश यात्राएं की हैं, वे किन लोगों से मिले हैं और उनकी इन यात्राओं का खर्च किसने उठाया है। ये सवाल इसलिए अहम हैं क्योंकि राहुल गांधी कोई आम इंसान नहीं हैं। वे लोकसभा में विपक्ष के नेता हैं और एक सार्वजनिक हस्ती हैं। जनता को यह जानने का हक है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने कहा कि देखिए, राहुल गांधी हर बार ऐसा ही करते हैं। बिहार में यात्रा करने के बाद, वे दो महीने की छुट्टी पर विदेश चले गए थे। शायद तब वे वियतनाम गए थे, और हो सकता है कि इस बार भी वे वियतनाम ही गए हों। भाजपा नेताओं के इन बयानों से साफ है कि विपक्ष के नेता की विदेश यात्रा को लेकर सत्ताधारी दल हमलावर है। उन्होंने राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि वे मुद्दे उठाकर फिर विदेश चले जाते हैं। राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का यह सिलसिला जारी है। राहुल गांधी पिछले दो सप्ताह से दिल्ली में विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। आईएनडीआईए गठबंधन के इन प्रदर्शनों में कांग्रेस समेत कई दलों के नेता शामिल हुए थे। विपक्ष का मुख्य जोर मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़े सवालों पर रहा है। प्रदर्शनों के दौरान राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर वोट चोरी के आरोप लगाए थे। त्योहारों के सप्ताह को देखते हुए अब इन कार्यक्रमों को फिलहाल रोक दिया गया है। इस बीच उनके विदेश प्रस्थान ने नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। भाजपा ने राहुल गांधी की विदेश यात्राओं की आवृत्ति और उद्देश्य पर सवाल उठाए हैं। नेताओं ने कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता होने के नाते उन्हें अपनी यात्राओं का हिसाब जनता को देना चाहिए। वहीं कांग्रेस की ओर से अभी तक इस यात्रा के एजेंडे या मुलाकातों का विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया है। राहुल गांधी के चार दिवसीय वियतनाम दौरे के दौरान दिल्ली में विपक्षी गतिविधियाँ स्थगित रहेंगी। राजनीतिक विश्लेषक इस घटनाक्रम को त्योहारी अवकाश और राजनीतिक रणनीति दोनों से जोड़कर देख रहे हैं। आगे की गतिविधियों पर सभी की निगाहें टिकी हैं।