विवादित बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन कोलकाता वापस आ गई हैं. लेखिका अगस्त के बाद दूसरी बार बुधवार को कई इवेंट्स में शामिल होने के लिए शहर पहुंचीं. इस साल, वह महालया के लिए कोलकाता में ही रहेंगी. वह ईडन गार्डन्स में होने वाला महालया प्रोग्राम भी देखना चाहती हैं. हालांकि उन्होंने कहा कि वह इस साल दुर्गा पूजा के दौरान बंगाल में नहीं रह पाएंगी. उन्होंने उम्मीद जताई कि वह अगले साल कोलकाता में बंगाली फेस्टिवल दुर्गा पूजा का आनंद ले पाएंगी. तस्लीमा ने बांग्लादेश में कट्टरपंथी और आतंकवादी ताकतों की ‘बढ़ती’ संख्या पर भी अपना कड़ा गुस्सा जाहिर किया. पश्चिम बंगाल में सत्ता बदलने के बाद पिछले अगस्त में तस्लीमा नसरीन कोलकाता आई थीं. लगभग दो दशक बाद शहर आई लेखिका का मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने रवींद्र सदन में स्वागत किया था. दो महीने के अंदर ही वह बुधवार को फिर कोलकाता आई. बुधवार को नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरीं तस्लीमा ने पत्रकारों से कहा कि कोलकाता वापस आकर उन्हें बहुत खुशी हो रही है. उन्होंने कहा, “मैं इस बार पूजा में शामिल नहीं हो पाऊंगी. उससे पहले कई प्रोग्राम हैं. कल महाजाति सदन में एक प्रोग्राम है. फिर 9 अक्टूबर और 11 अक्टूबर को दो और प्रोग्राम हैं.” उन्होंने यह भी कहा, “इस बार मैं महालया में शामिल हो रही हूं. अगर संभव हुआ तो मैं ईडन गार्डन्स में महालया प्रोग्राम देखूंगी. मैं इस बार पूजा में शामिल नहीं हो पाऊंगी, लेकिन अगले साल से मैं दुर्गा पूजा में जरूर आऊंगी. मुझे यहां की पूजा बहुत पसंद है. यह एक कला प्रदर्शनी (Art Exhibition) जैसी लगती है. पूजा के लिए सभी को शुभकामनाएं, प्यार और सम्मान।. कल महाजाति सदन में प्रोग्राम में मेरी कविताएं और मेरी कविताओं के गीत पेश किए जाएंगे. ‘उमा सम्मान’ दिया जाएगा. देवी की वंदना होगी. यह बहुत अच्छा प्रोग्राम होगा. 11 अक्टूबर को बी.डी. साल्ट लेक के बी.डी. ऑडिटोरियम में एक प्रोग्राम है. वहां एक साहित्यिक कार्यक्रम होने वाला है. साथ ही, वहां मेरी एक किताब लॉन्च होगी और नेशनल लाइब्रेरी में एक मैगज़ीन लॉन्च होगी।.” जब पत्रकारों ने बांग्लादेश का मुद्दा उठाया, तो लेखिका ने कट्टरपंथी ताकतों के खिलाफ आवाज उठाई. उन्होंने दावा किया कि बांग्लादेश सरकार आतंकवाद और कट्टरपंथ को बढ़ावा दे रही है. उन्होंने सरकार से इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की अपील की. तस्लीमा ने कहा, “सरकारी संरक्षण की वजह से जिहादी आतंकी समूहों में वृद्धि हुई है. अगर देश को स्वस्थ और सभ्य बनना है, तो इन चरमपंथी कट्टरपंथियों का विरोध करना होगा. इन्हें खत्म करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं है.”