प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को सरकार के मुखिया के तौर पर अपनी 25 साल की लगातार सेवा पूरी करने के मौके पर राष्ट्रीय राजधानी के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में आयोजित विकसित भारत संकल्प सभा ‘सेवा ज्योति’ प्रोग्राम को संबोधित किया. अपनी पूरी राजनीतिक यात्रा का श्रेय नागरिकों के अटूट विश्वास और समर्थन को देते हुए प्रधानमंत्री ने देश के लोगों के प्रति श्रद्धा से सिर झुकाया और नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) में अपने साथियों का आभार व्यक्त किया. देश के भविष्य के लिए एक बड़ा रोडमैप तय करते हुए प्रधानमंत्री ने ऐलान किया, ‘2047 में विकसित भारत-हम करके रहेंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि उन्होंने अपने राज के सफर में कभी अकेला महसूस नहीं किया. उन्होंने देश भर के जमीनी कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों को सलाम किया. उन्होंने कहा कि वे इस हमेशा चलने वाले आदर्श वाक्य से चलते हैं- ‘हम सेवक हैं. हम मानवता के सेवक हैं.’ प्रधानमंत्री ने देश के कल्चरल मूल्यों की रक्षा में पार्टी कार्यकर्ताओं के बिना किसी स्वार्थ के समर्पण को माना. ‘मुझे कभी नहीं लगा कि मैं अकेला हूँ. ऐसे अनगिनत स्वयंसेवक हैं जो भारत की सांस्कृतिक आत्मा के रखवाले हैं, जिनका एकमात्र मकसद है- भारत की सेवा करना. वे इसी भावना से जीते हैं और हर पल खुद को याद दिलाते हैं— ‘हम सेवक हैं।. हम इंसानियत के सेवक हैं।.’ पीएम मोदी ने कहा, ‘मैं हर उस स्वयंसेवक और कार्यकर्ता को आदरपूर्वक सलाम करता हूं जो समर्पण और लगन के साथ देश की सेवा करते रहते हैं.’ इस बात पर जोर देते हुए कि शासन में उनकी 25 साल की सेवा किसी एक की उपलब्धि के बजाय एक सामूहिक राष्ट्रीय खजाना है, प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सेवा पर देश का सबसे बड़ा हक है. देश ने मुझे बहुत कुछ दिया है. इसलिए देश के प्रति मेरी जिम्मेदारी भी सबसे बड़ी है. और मुझे पूरा विश्वास है कि देश के हर नागरिक का मुझ पर सबसे बड़ा हक है. उन्होंने कहा, ‘जनता का ये 25 साल का भरोसा, ये 25 साल का अनुभव एक बहुत बड़ी संपत्ति है. और यह संपत्ति सिर्फ मोदी की नहीं है, यह संपत्ति पूरे देश की है. भारत माता का हर बच्चा इस संपत्ति का हकदार है.’ अपने कार्यकाल की चुनौतियों और मील के पत्थरों पर पीएम मोदी ने कहा कि वह बहुत आभार के साथ पीछे मुड़कर देखते हैं. साथ ही कहा कि हर अनुभव- जिसमें आलोचना भी शामिल है- ने एक जरूरी शिक्षक का काम किया. ‘जब मैं आज पीछे मुड़कर देखता हूँ, तो मुझे सिर्फ आभार महसूस होता है. मैं हर उस इंसान और हर उस अनुभव का शुक्रगुजार हूँ जिसने मुझे कुछ सिखाया. जिन्होंने मुझे सिखाया, उन्होंने मुझे विनम्रता सिखाई. जिन्होंने मुझे गिराया, उन्होंने मुझे फिर से उठना सिखाया. मेरे समर्थकों ने मुझे हिम्मत दी, जबकि मेरे आलोचकों ने मुझे अपने अंदर झाँकना सिखाया. प्रधानमंत्री ने कहा, ‘जो लोग मेरे साथ खड़े रहे, उन्होंने मुझे भरोसे की ताकत दिखाई।.’ ‘सेवा ज्योति’ प्रोग्राम में सीनियर नेता, जाने-माने लोग और हजारों कार्यकर्ता मौजूद थे जो पीएम मोदी की बिना रुके पब्लिक सर्विस की यात्रा को याद करने के लिए इकट्ठा हुए थे. यह यात्रा 7 अक्टूबर 2001 को शुरू हुई थी जब उन्होंने पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली थी. देश के मिलकर किए गए इरादे पर पूरा भरोसा दिखाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को देश के खास पड़ाव बताए- टॉप तीन ग्लोबल इकॉनॉमी बनने से लेकर ओलंपिक गेम्स होस्ट करने तक और कहा ‘हम करके रहेंगे’ की भावना के साथ पूरा करेंगे. देश के भविष्य के लिए एक बड़ा रोडमैप तय करते हुए प्रधानमंत्री ने ऐलान किया, ‘2047 में विकसित भारत- हम करके रहेंगे. टॉप 3 इकॉनमी—हम करके रहेंगे. आत्मनिर्भर भारत—हम करके रहेंगे. ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब—हम रहेंगे. ओलंपिक्स होस्ट करना—हम करके रहेंगे. स्पेस में कदम—हम करके रहेंगे. यह एनर्जी, यह जोश, यह आत्मविश्वास बहुत खास है.’