पश्चिम बंगाल की रेजीनगर मुर्शिदाबाद और नंदीग्राम पूर्व मेदिनीपुर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को होने जा रहे उप-चुनाव के प्रचार के आखिरी दौर में राज्य का सियासी पारा पूरी तरह चढ़ चुका है। 60 प्रतिशत से ज्यादा मुस्लिम आबादी वाले रेजीनगर क्षेत्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी का मुकाबला करने के लिए ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस ने एक हैरान करने वाला दांव खेलते हुए कांग्रेस और वामदलों से विपक्षी एकजुटता दिखाने की अपील की है। तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता कुणाल घोष ने साफ किया कि वैसे तो उनका कांग्रेस और सीपीएम के साथ कोई औपचारिक चुनावी गठबंधन नहीं हुआ है लेकिन बूथ कैप्चरिंग और मतों की रक्षा के लिए विपक्षी ताकतों को एक साथ खड़े होना चाहिए। मुर्शिदाबाद में अंतिम चरण के चुनाव प्रचार के दौरान ममता टीएमसी के मुख्य प्रवक्ता कुणाल घोष ने मीडिया से बातचीत में कहा कि हमने भले ही इस उप-चुनाव में कांग्रेस और सीपीएम के साथ गठबंधन न किया हो जिससे विपक्षी वोट बंट सकते हैं। लेकिन पोलिंग बूथों की रक्षा करना और आम जनता के मतदान के अधिकार को बचाना हम सभी विरोधी दलों की सामूहिक जिम्मेदारी है। भाजपा को बूथों पर कब्जा करने से रोकने के लिए सबको आगे आना होगा। घोष के अनुसार बूथ कैप्चरिंग का खतरा वास्तविक है और इसे रोकने के लिए विपक्षी दलों को मिलकर काम करना चाहिए। मतों की सुरक्षा लोकतंत्र की बुनियादी जरूरत है। तृणमूल कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि कांग्रेस और वामदलों के साथ कोई आधिकारिक चुनावी गठबंधन नहीं बना है। इसके बावजूद बूथ स्तर पर सहयोग की जरूरत पर जोर दिया गया। प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा कि विपक्षी वोट बंटने की आशंका के बावजूद मतदाताओं के अधिकार की रक्षा सबसे ऊपर है। रेजीनगर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में बूथ कैप्चरिंग की आशंका को लेकर टीएमसी चिंतित है। नंदीग्राम में भी चुनावी माहौल गरमाया हुआ है। विपक्षी दलों से की गई यह अपील चुनावी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। तृणमूल कांग्रेस की यह अपील ऐसे समय में आई है जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर विवाद और कॉकरोच जनता पार्टी के देशव्यापी आंदोलन को लेकर कांग्रेस और वामदल भी लगातार हमलावर हैं। विपक्षी दल चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में बूथ सुरक्षा को लेकर टीएमसी की अपील राजनीतिक महत्व रखती है। सभी विपक्षी ताकतें लोकतंत्र की रक्षा के नाम पर एक मंच पर आने की संभावना तलाश रही हैं। उपचुनाव के नतीजे राज्य की राजनीति को प्रभावित कर सकते हैं। 6 अक्टूबर को मतदान से पहले दोनों सीटों पर प्रचार चरम पर है। टीएमसी बूथ कैप्चरिंग के डर को लेकर सतर्क है और विपक्षी दलों से सहयोग मांग रही है। कांग्रेस और वामदलों की प्रतिक्रिया अभी साफ नहीं हुई है। बूथ स्तर पर निगरानी बढ़ाने की मांग की जा रही है। चुनाव आयोग पर भी निष्पक्ष व्यवस्था सुनिश्चित करने का दबाव है। पश्चिम बंगाल के इन उपचुनावों में सुरक्षा व्यवस्था और मतदान प्रक्रिया की पारदर्शिता सबसे बड़ा मुद्दा बनकर उभरी है। अंतिम चरण में सभी दल अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं।
