बिहार में बैंक लोन के नाम पर बड़ा अंतरराष्ट्रीय फर्जीवाड़ा सामने आया है. मामला मोतिहारी का है, जहां बैंक लोन के नाम पर ये खेल चल रहा था. पुलिस के अनुसार, कुंडवा चैनपुर इलाके में एक सीएसपी केंद्र के जरिए नेपाली महिलाओं को भारतीय नागरिक बताकर फर्जी दस्तावेज तैयार कराने और उनके नाम पर बैंक लोन दिलाने का कथित नेटवर्क चल रहा था. पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सीएसपी संचालक समेत दो नेपाली महिलाओं को गिरफ्तार किया है. छापेमारी के दौरान पुलिस को आधार कार्ड, वोटर आईडी और अन्य दस्तावेज मिलने की बात कही गई है. मामले की जांच अब फर्जी दस्तावेज से लेकर बैंक लोन की पूरी प्रक्रिया तक पहुंच गई है. पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक, कथित नेटवर्क की एक कड़ी नेपाल से शुरू होती थी. नेपाली महिलाएं कुंडवा चैनपुर इलाके के सीएसपी केंद्र तक पहुंचती थीं, जहां से उनके लिए भारतीय पहचान और पते से जुड़े दस्तावेज तैयार कराने की कथित प्रक्रिया शुरू होती थी. आरोप है कि नेपाली महिलाओं को भारतीय नागरिक के तौर पर दिखाने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार कराए जाते थे. इन दस्तावेजों में भारतीय पता और पहचान से जुड़ी जानकारी दर्ज होने की बात कही जा रही है. इन्हीं कागजातों के आधार पर आगे बैंकिंग प्रक्रिया शुरू की जाती थी. जांच में आरोप सामने आया है कि महिलाओं के लिए पश्चिम बंगाल के पते पर आवासीय प्रमाण पत्र तैयार कराया जाता था. इसके लिए महिलाओं की जानकारी कथित नेटवर्क के जरिए बंगाल भेजी जाती थी. अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि ये प्रमाण पत्र किसने और किस प्रक्रिया के जरिए तैयार कराए. पश्चिम बंगाल के कथित प्रमाण पत्र के बाद दस्तावेजों की अगली कड़ी उत्तराखंड से जुड़ने की बात कही जा रही है. आरोप है कि उत्तराखंड में सक्रिय नेटवर्क के जरिए नेपाली महिलाओं के नाम से फर्जी आधार कार्ड और वोटर आईडी तैयार कराए जाते थे. फर्जी पहचान और पते से जुड़े दस्तावेज तैयार होने के बाद अगला लक्ष्य बैंक लोन होता था. आरोप है कि महिलाओं को समूह में शामिल कर उनके नाम पर स्मॉल फाइनेंस बैंक से लोन दिलाने की प्रक्रिया शुरू की जाती थी. ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक मदद देने के लिए समूह आधारित लोन की व्यवस्था की गई है. आरोप है कि इसी व्यवस्था का कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया और नेपाली महिलाओं को भारतीय लाभार्थी के तौर पर समूहों में शामिल कर उनके नाम पर लोन लेने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई. पुलिस की शुरुआती जांच में एजेंट के जरिए कमीशन लिए जाने का भी आरोप सामने आया है. बताया जा रहा है कि लोन दिलाने के नाम पर कथित तौर पर 30 से 40 हजार रुपये तक कमीशन तय किया जाता था. हालांकि, इस रकम और भुगतान की पूरी पुष्टि जांच के बाद ही होगी. कथित फर्जीवाड़े का सबसे अहम हिस्सा लोन की वसूली से जुड़ा है. अगर कागज पर किसी महिला का भारतीय पता दर्ज हो, लेकिन वास्तविक महिला उस पते पर रहती ही न हो, तो लोन की रकम की वसूली के समय बैंक के सामने मुश्किल खड़ी हो सकती है. मान लीजिए किसी भारतीय महिला के वास्तविक पते पर किसी नेपाली महिला के नाम से फर्जी आधार और वोटर आईडी तैयार कर दिया गया. इसके बाद उसी पते को आधार बनाकर उसके नाम पर बैंक लोन स्वीकृत करा दिया गया. वसूली के लिए बैंक उस पते पर पहुंचता है, लेकिन वहां दस्तावेज में दर्ज महिला मौजूद नहीं मिलती है. अब जांच का एक अहम हिस्सा बैंकिंग प्रक्रिया भी बन गया है. शुरुआती जांच में RBL बैंक के कुछ कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच किए जाने की बात सामने आ रही है. हालांकि, किस कर्मचारी की क्या भूमिका थी, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा. अगर दस्तावेज कथित तौर पर फर्जी थे, तो बैंक की KYC और पते की जांच में ये दस्तावेज पकड़ में क्यों नहीं आए? जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि लोन स्वीकृत करने से पहले दस्तावेजों का किस स्तर पर सत्यापन हुआ था. कुंडवा चैनपुर के सीएसपी केंद्र पर महिलाओं की लगातार आवाजाही ने पुलिस का ध्यान खींचा. थाना स्तर पर गतिविधियां संदिग्ध लगने के बाद सूचना तंत्र को सक्रिय किया गया और केंद्र से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी जुटाई गई. मामले की सूचना मोतिहारी के एसपी स्वर्ण प्रभात तक पहुंची. भारत-नेपाल सीमा से जुड़े होने और कथित फर्जी दस्तावेजों का मामला होने के कारण पुलिस ने कार्रवाई की और सीएसपी केंद्र पर छापेमारी की. पुलिस ने सीएसपी केंद्र से आधार कार्ड, वोटर आईडी और अन्य दस्तावेज बरामद किए. इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर अब जांच की जा रही है कि कितने लोगों की पहचान तैयार की गई और कितने लोगों के नाम पर बैंकिंग गतिविधियां कराई गईं. ‘हमलोगों को सीएसपी केंद्र पर संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिली थी. सूचना के आधार पर कार्रवाई की गई, जिसमें दो नेपाली महिलाओं और सीएसपी संचालक को पकड़ा गया है. मौके से कई दस्तावेज और पहचान पत्र बरामद हुए हैं. पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है. यह पता लगाया जा रहा है कि इस मामले में और कौन-कौन लोग शामिल हैं. आरोपियों को जेल भेज दिया गया है.”- अमन कुमार, थाना प्रभारी, कुड़वा चैनपुर जांच एजेंसियों के सामने अब यह सवाल है कि कथित नेटवर्क सिर्फ एक सीएसपी तक सीमित था या दूसरे केंद्र भी इसकी चपेट में थे. समूह लोन से जुड़े लाभार्थियों और दस्तावेजों की जांच से तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है. इस मामले की सबसे अहम कड़ी इसका अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय स्वरूप है. आरोपों के मुताबिक, नेपाल से महिलाएं बिहार पहुंचती थीं, बिहार के सीएसपी से प्रक्रिया आगे बढ़ती थी, पश्चिम बंगाल के पते पर प्रमाण पत्र और उत्तराखंड से पहचान संबंधी दस्तावेज तैयार कराने की बात सामने आ रही है. अगर जांच में नेपाली नागरिकों के लिए फर्जी भारतीय पहचान पत्र तैयार कराने का आरोप सही साबित होता है, तो मामला सिर्फ बैंक लोन धोखाधड़ी तक सीमित नहीं रहेगा. इससे भारतीय पहचान दस्तावेजों की विश्वसनीयता और भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र की सुरक्षा से जुड़े सवाल भी उठेंगे. पुलिस की जांच अब इस कथित नेटवर्क की पूरी चेन तक पहुंचने की कोशिश कर रही है. फर्जी दस्तावेज कहां तैयार हुए, बंगाल और उत्तराखंड में कौन लोग जुड़े थे, कितने लोन स्वीकृत हुए और बैंक कर्मियों की भूमिका क्या थी—इन सभी सवालों के जवाब जांच से सामने आएंगे. फिलहाल इस पूरे नेटवर्क से जुड़े कुल वित्तीय नुकसान की आधिकारिक रकम स्पष्ट नहीं है. इसलिए करोड़ों रुपये के स्कैम का आरोप सामने आने के बावजूद वास्तविक रकम, फर्जी लोन की संख्या और बैंक को हुए नुकसान की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही की जा सकेगी. फिलहाल पुलिस ने सीएसपी संचालक समेत तीन लोगों को गिरफ्तार कर जांच शुरू कर दी है. अब जांच का फोकस नेपाल से आने वाली महिलाओं, फर्जी भारतीय दस्तावेज तैयार कराने वाले कथित नेटवर्क, एजेंटों, बैंकिंग प्रक्रिया और बिहार से बाहर जुड़े लोगों तक पहुंचने पर है.