जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोमवार को विधानसभा में कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए। इनमें मंत्रियों और विधायकों के वेतन-भत्तों में संशोधन तथा पूर्व विधायकों की पेंशन बढ़ाने से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं। इसके अलावा जीएसटी और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस से संबंधित विधेयक भी सदन में लाए गए। उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर राज्य विधानमंडल सदस्यों के वेतन और भत्तों से जुड़े 1960 के कानून में संशोधन का विधेयक पेश किया। विधेयक के अनुसार विधायकों के वेतन और विभिन्न भत्तों में कुल मिलाकर बढ़ोतरी प्रस्तावित है। वर्तमान प्रावधानों के तहत विधायक का वेतन ₹60 हजार से बढ़ाकर ₹80 हजार, निर्वाचन क्षेत्र भत्ता ₹60 हजार से बढ़ाकर ₹70 हजार और मेडिकल भत्ता ₹10 हजार से बढ़ाकर ₹15 हजार करने का प्रस्ताव है। इस तरह वेतन-भत्तों की कुल राशि ₹1.30 लाख से बढ़कर ₹1.65 लाख प्रतिमाह हो सकती है। मंत्रियों और राज्य मंत्रियों के वेतन से संबंधित 1956 के कानून में संशोधन के लिए भी विधेयक पेश किया गया। प्रस्ताव के मुताबिक मुख्यमंत्री का मासिक वेतन ₹70 हजार से बढ़ाकर ₹95 हजार और मंत्री का वेतन ₹65 हजार से बढ़ाकर ₹85 हजार किया जा सकता है। यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब पिछले विधानसभा सत्र में जनप्रतिनिधियों के वेतन और सुविधाओं में बदलाव का मुद्दा उठाया गया था। इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों वाली एक समिति ने इस मामले पर विचार किया था। उमर अब्दुल्ला ने पूर्व विधायकों की पेंशन से जुड़े 1984 के कानून में संशोधन का विधेयक भी सदन में रखा। इसमें पूर्व विधायकों की मासिक पेंशन ₹50 हजार से बढ़ाकर ₹60 हजार करने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही परिवार पेंशन के दायरे में विधायकों की विधवा और तलाकशुदा बेटियों को शामिल करने का प्रावधान भी प्रस्तावित किया गया है। विधानसभा में पेश किए गए पांच प्रमुख विधेयकों में वेतन और पेंशन से जुड़े तीन विधेयकों के अलावा जम्मू-कश्मीर जीएसटी कानून में संशोधन और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस से संबंधित विधेयक शामिल हैं। सरकार का कहना है कि जीएसटी संशोधन का उद्देश्य केंद्रीय जीएसटी कानून में हुए बदलावों के अनुरूप प्रावधानों को ढालना और व्यावहारिक दिक्कतों को दूर करना है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक में अनुमति-आधारित व्यवस्था की जगह नियम-आधारित प्रशासन को बढ़ावा देने और कारोबार के लिए प्रक्रियाओं को आसान बनाने का प्रस्ताव है। इन प्रस्तावों को विधानसभा में पेश किए जाने के बाद अब इन पर आगे की विधायी प्रक्रिया होगी। इसलिए वेतन, भत्ते और पेंशन में प्रस्तावित बदलावों की अंतिम स्थितिसदन में विधेयकों के पारित होने और आगे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
