58 लाख 20 हज़ार 898 नाम ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर! SIR को लेकर तृणमूल सुप्रीम कोर्ट पहुंची

वोटर लिस्ट में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रोसेस को लेकर तृणमूल कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट जा रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को गंगासागर से यह चेतावनी दी। राज्य की सत्ताधारी पार्टी ने मंगलवार को भी ऐसा ही केस किया था। तृणमूल ने आरोप लगाया कि चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रोसेस में 58 लाख 20 हजार 898 नाम हटा दिए गए हैं। इसके लिए न तो कोई नोटिस भेजा गया है और न ही कोई सुनवाई हुई है। पार्टी के राज्यसभा नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने तृणमूल की ओर से सुप्रीम कोर्ट में केस किया है। उन्होंने कहा, “16 दिसंबर 2025 को इलेक्शन कमीशन ने पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट का ड्राफ्ट पब्लिश किया था। इसमें 58 लाख 20 हजार 898 लोगों के नाम बाहर कर दिए गए थे। इसके लिए कोई पर्सनल हियरिंग नहीं हुई। किसी को कोई नोटिस नहीं भेजा गया। 2025 में स्पेशल समरी रिवीजन के बाद वोटर्स की संख्या 7 करोड़ 66 लाख 37 हजार 529 से अचानक घटकर 7 करोड़ 8 लाख 16 हजार 616 हो गई। यह घटना इलेक्शन कमीशन द्वारा 11 अगस्त 2023 को वोटर लिस्ट से नाम हटाने के लिए जारी डिटेल्ड SOP के खिलाफ है।” SIR का नोटिस और हियरिंग फेज 7 फरवरी को खत्म होगा। उसके बाद 14 फरवरी को फाइनल वोटर लिस्ट पब्लिश की जाएगी। इसलिए पॉलिटिकल पार्टियों को लगता है कि इसके तुरंत बाद पश्चिम बंगाल में असेंबली इलेक्शन का शेड्यूल पब्लिश हो जाएगा। उसी पर केस किया गया है। इस मामले में तृणमूल ने दलील दी, “पश्चिम बंगाल में SIR प्रोसेस शुरू होने के बाद से, इलेक्शन कमीशन अलग-अलग समय पर ज़मीनी स्तर के वर्कर्स, BLOs, AEROs, EROs और DEOs को अनऑफिशियली निर्देश दे रहा है। उदाहरण के लिए, WhatsApp मैसेज और वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान बोलकर निर्देश दिए जा रहे हैं। ऐसे 50 उदाहरण दिए जा सकते हैं। कोई नोटिस, सर्कुलर या गाइडलाइन जारी नहीं की जा रही है।” 4 जनवरी को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार को एक लेटर लिखकर SIR प्रोसेस रोकने की रिक्वेस्ट की थी। पिछले कुछ दिनों में देश के चुनाव ऑर्गनाइज़ करने वाली संस्था के हेड को ममता का यह तीसरा लेटर है। उन्होंने डिटेल में आरोप लगाया था कि वोटर लिस्ट के स्पेशल रिवीजन की सुनवाई के दौरान बीमार से लेकर बुज़ुर्ग तक को फ़ोन करके परेशान किया जा रहा था। उन्होंने यह भी दावा किया कि वोटर लिस्ट में रिवीजन के नाम पर एलिजिबल वोटर्स के नाम हटाने की साज़िश थी। इसके अलावा, ममता ने आरोप लगाया कि इस बड़े प्रोसेस को दो महीने में पूरा करने की जल्दबाज़ी में डेमोक्रेसी की बुनियाद ही हिल रही है। यह लेटर भेजने के अगले दिन यानी सोमवार को ममता गंगासागर गईं और कहा कि लड़ाई कानूनी तरीकों से होगी। मुख्यमंत्री को यह कहते हुए सुना गया, “मंगलवार को कोर्ट खुलेगा, हम कानून का भी सहारा लेंगे। इतने लोगों की मौत के खिलाफ, जिस तरह से उन्होंने इतने लोगों को परेशान किया है।” 24 घंटे के अंदर ही रूलिंग पार्टी ने इलेक्शन कमीशन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। SIR से जुड़े कई केस पहले से ही देश की टॉप कोर्ट में पेंडिंग हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *