बंगाल बीजेपी अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने शुभेंदु अधिकारी को कड़ा संदेश दिया

गुरुवार को अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के मौके पर अलीपुर के नेशनल लाइब्रेरी ऑडिटोरियम में हुए एक कार्यक्रम में बंगाल BJP के अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने मंच से शुभेंदु अधिकारी को कड़ा संदेश दिया। उस दिन कार्यक्रम में बोलते हुए शुभेंदु अधिकारी पांच साल पहले कमल का फूल फेंकने के बाद कमल का फूल हाथ में लेने की कहानी सुना रहे थे। इसके ठीक बाद सभा को संबोधित कर रहे शमिक ने नंदीग्राम के MLA को सीधे संदेश दिया कि वे इस पुरानी आदत को दोबारा न दोहराएं। प्रदेश BJP अध्यक्ष ने शुभेंदु को यह भी सलाह दी कि वे भविष्य में भाषण देते समय अपने तृणमूल अध्याय की कहानी न सुनाएं। इस तरह शमिक ने पुराने BJP नेताओं और कार्यकर्ताओं के सामने शुभेंदु के आने वाले भाषण के विषय को लेकर भगवा खेमे में तीखी बहस खींच दी। नेशनल लाइब्रेरी ऑडिटोरियम में BJP के ‘गुड गवर्नेंस’ कार्यक्रम में शमिक और शुभेंदु के साथ पार्टी के केंद्रीय नेता सुनील बंसल, केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार, पूर्व अध्यक्ष राहुल सिन्हा और संगठन के दूसरे नेता भी मौजूद थे। इस मीटिंग में शुभेंदु ने अपने छोटे से भाषण में पांच साल पहले तृणमूल छोड़कर बीजेपी में शामिल होने का इतिहास बताया। उस कहानी को सुनाते हुए उन्होंने बीजेपी में आने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं की कैटेगरी भी बताई। उनके शब्दों में, ‘मुझे पर्सनली लगता है कि अलग-अलग पार्टियों से बीजेपी में शामिल होने के तीन कारण हैं। किसी पार्टी के चुनाव के दौरान आना, चुनाव लड़ना, जीतना, जीतकर भाग जाना, या हारकर वापस पवेलियन जाना। एक और ग्रुप है। जब कोई दूसरी पार्टी उससे (संबंधित नेता) सब कुछ छीन लेती है, उसे राजनीति करने का मौका नहीं मिलता, तो वह दूसरी पार्टी में शरण लेता है। दूसरी पार्टी उसे मेंबरशिप देती है, उसकी काबिलियत के हिसाब से उसका इस्तेमाल करती है। एक और ग्रुप है। वह खुद सारे पद छोड़कर पार्टी छोड़ देता है। वह बिना कुछ पाने के इरादे से राजनीतिक पार्टियां बदलता है। मैं इसी ग्रुप में आता हूं।’ 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल में दूसरी पार्टियों से भगवा खेमे में शामिल होने का ट्रेंड शुरू हुआ था। 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद एक ट्रेंड बढ़ा। 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले मुकुल रॉय, दिलीप घोष, कैलाश विजयवर्गीय की मौजूदगी में ‘ज्वाइनिंग फेयर’ शुरू हुआ। शुवेंदु ने खुद को दूसरी पार्टियों से BJP में शामिल हुए ‘तीसरी जमात’ के नेता के तौर पर पहचाना और कहा, ‘मैंने पांच ऑफिस छोड़े, तीन बैंकों के चेयरमैन के पद छोड़े और BJP में आया। BJP ने मुझे बुलाया, अमित शाह ने बुलाया। दिलीप बाबू (घोष) ने बुलाया। सुब्रत बाबू (चट्टोपाध्याय) ने बुलाया। कैलाश विजयवर्गीय ने बुलाया। कई लोग भाग गए, शुवेंदु अधिकारी भागने वाले इंसान नहीं हैं।’ हालांकि शमिक को नहीं लगता कि शुवेंदु ने तृणमूल सरकार के कितने ऑफिस छोड़े हैं, इस बारे में बातें दोहराने की कोई ज़रूरत है। BJP के इस बहुत पुराने नेता ने अपने भाषण की शुरुआत में शुवेंदु से कहा, ‘मेरे पिछले भाषण में, उन्होंने (शुभेंदु) कहा था कि उन्होंने ऑफिस छोड़ा, बुलावे पर आए, ये सब पुरानी बातें हैं। मैं अपने छोटे भाई से अपील करूंगा, मैं उससे रिक्वेस्ट करूंगा कि वह आगे किसी मीटिंग में ऐसा न कहे। क्योंकि, वह BJP में शामिल हो गया है।’ शमिक के यह कमेंट करने के बाद ऑडिटोरियम में BJP नेताओं और कार्यकर्ताओं ने ज़ोरदार तालियां बजाईं। शमिक ने पुराने BJP कार्यकर्ताओं से यह भी कहा, ‘पहले एक कार होती थी, छह लोग सवार होते थे। कार्यकर्ताओं को पता था कि उन्हें कुछ नहीं मिलेगा।’ ‘तब कोई भी पद, लालच या कमेटी के लिए BJP में शामिल नहीं हुआ था।’ इस मीटिंग के बाद, न तो शुवेंदु और न ही शमिक ने इस मामले पर आगे कोई कमेंट किया। लेकिन शमिक के कमेंट्स ने BJP के अंदर तीखी बहस को हवा दे दी है। लेकिन क्या अब कुछ लोग ‘पद’ या ‘लालच’ की वजह से BJP में शामिल हुए हैं? यह अंदाज़ा और मज़बूत हो गया है।

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