फिजियोथेरेपिस्ट डॉक्टर नहीं होते। इसलिए उनके नाम के आगे ‘डॉ’ नहीं लगाया जा सकता। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय ने भारतीय चिकित्सा संघ को भेजे एक पत्र में यह बात कही है। उनका तर्क है कि अगर नाम के आगे ‘डॉ’ या ‘डॉ’ प्रत्यय लगाया जाता है, तो यह मरीजों और आम जनता के लिए भ्रामक हो सकता है। गौरतलब है कि स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय से संबद्ध है और देश में चिकित्सा शिक्षा के लिए प्रमुख नियामक संस्था है। पत्र में कहा गया है कि इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन (IAPMR) समेत कई संगठनों ने अप्रैल में जारी नए पाठ्यक्रम का विरोध किया है। पाठ्यक्रम में ही कहा गया था कि फिजियोथेरेपिस्ट अपने नाम के आगे ‘डॉ’ लगा सकते हैं। लेकिन स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय ने कहा कि फिजियोथेरेपिस्ट को डॉक्टरों या मेडिकल प्रैक्टिशनर्स के समान प्रशिक्षण नहीं मिलता। इसलिए उनके नाम के आगे ‘डॉ’ लगाना उचित नहीं है। पत्र में यह भी कहा गया है कि फिजियोथेरेपिस्ट मेडिकल प्रैक्टिशनर नहीं हैं। इसलिए, वे केवल डॉक्टरों के निर्देश पर ही सेवाएं प्रदान कर सकते हैं। पत्र में पटना उच्च न्यायालय, बेंगलुरु न्यायालय और मद्रास उच्च न्यायालय के क्रमशः 2003, 2022 और 2023 के तीन मामलों का हवाला दिया गया है और कहा गया है कि डॉक्टर शब्द का इस्तेमाल केवल पंजीकृत चिकित्सा व्यवसायी ही कर सकते हैं। अगर कोई बिना मेडिकल डिग्री के अपने नाम के आगे ‘डॉक्टर’ शब्द का इस्तेमाल करता है तो यह कानून के खिलाफ है। अगर ऐसा सबूत मिलता है तो उस व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय ने पाठ्यक्रम में जल्द बदलाव करने को कहा है। साथ ही, यह भी देखा जा रहा है कि क्या फिजियोथेरेपिस्ट द्वारा डॉक्टर की जगह इस्तेमाल किए जाने वाले किसी शब्द से मरीजों और आम जनता में भ्रम की स्थिति पैदा होगी।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि फिजियोथेरेपिस्ट डॉक्टर नहीं हैं, वे अपने नाम के आगे ‘डॉक्टर’ नहीं लिख सकते