शोधकर्ता और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो ने उनकी तत्काल रिहाई की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सोनम को लद्दाख में अशांति भड़काने के आरोप में पिछले शुक्रवार को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत गिरफ्तार किया गया था। वह फिलहाल राजस्थान की जोधपुर जेल में बंद हैं। सोनम की गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए पत्नी गीतांजलि ने वकील सर्वम रितम खाद के जरिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में उन्होंने अपने पति की तत्काल रिहाई की भी मांग की है। साथ ही उन्होंने यह भी सवाल उठाया है कि सोनम के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून क्यों लगाया गया। एक हफ्ते बाद भी गीतांजलि ने आरोप लगाया है कि उन्हें सोनम की शारीरिक स्थिति और उनकी नजरबंदी के कारण के बारे में कोई जानकारी नहीं है। सिर्फ सुप्रीम कोर्ट में ही नहीं, सोनम की पत्नी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पत्र लिखकर अपने पति की तत्काल रिहाई की मांग की है लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) पिछले पांच साल से लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने और राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। पिछले साल एलएबी के सदस्य पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक ने इसी मांग को लेकर भूख हड़ताल की थी। उनके नेतृत्व में लद्दाखियों ने पैदल ‘दिल्ली चलो’ मार्च निकाला था। सोनम ने इसी मांग को लेकर इस साल 10 सितंबर से भूख हड़ताल शुरू की थी। ऐसे माहौल में 24 सितंबर को लद्दाख के युवाओं ने अचानक लद्दाख की राजधानी लेह में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। केंद्र शासित प्रदेश अशांत हो गया। स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए गोलियां भी चलाईं। आंसू गैस के गोले भी दागे गए। अर्धसैनिक बलों को भी तैनात किया गया। लेह व्यावहारिक रूप से युद्ध के मैदान में बदल गया। पुलिस और सेना के साथ गोलीबारी में 4 लोग मारे गए। घायलों की संख्या लगभग 90 थी। हालांकि, गृह मंत्रालय ने दावा किया कि दोपहर तक स्थिति नियंत्रण में थी। इस बीच, लद्दाख में कर्फ्यू लगा दिया गया। ऐसे में, सोनम वांगचुक ने 15 दिन बाद अपनी भूख हड़ताल वापस ले ली। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने की अपील की। इस बीच, गृह मंत्रालय ने आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से एक सोनम को हिंसा के लिए ज़िम्मेदार ठहराया। दो दिन बाद उन्हें अशांति भड़काने के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया गया। सुरक्षा कारणों से उन्हें जोधपुर जेल में रखा गया।
