क्या जादवपुर विश्वविद्यालय में शराब पार्टी चल रही थी? छात्रा की मौत को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं!

रात 10 बजे के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम क्यों होता है? विश्वविद्यालय के अंदर शराब पार्टी चल रही थी? जादवपुर विश्वविद्यालय में एक छात्रा की रहस्यमय मौत के बाद कई सवाल उठ रहे हैं। गुरुवार (11 सितंबर) की रात तीसरे वर्ष की छात्रा विश्वविद्यालय के गेट नंबर 4 के पास एक झील में गिर गई। बाद में उसे बचा लिया गया और अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। छात्रा की मौत के बाद कई सवाल उठने लगे हैं। मृतक छात्रा के माता-पिता ने भी विश्वविद्यालय को कटघरे में खड़ा किया है। छात्रा के शव का पोस्टमार्टम आज, शुक्रवार को कांतापुकुर मुर्दाघर में होगा। पोस्टमार्टम प्रक्रिया की जांच की जाएगी। फिलहाल, अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पोस्टमार्टम की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर मामला दर्ज किया जाएगा। जादवपुर विश्वविद्यालय में ड्रामा क्लब द्वारा आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम कल पार्किंग में चल रहा था। तीसरे वर्ष की छात्रा कार्यक्रम देखने आई थी। ज्ञात हुआ है कि उसका घर निमता में है। छात्रा कल रात करीब 9:55 बजे शौचालय जाने के लिए उठी थी। इसके बाद वह किसी तरह पार्किंग के दूसरी तरफ स्थित गहरे तालाब में गिर गई। चूंकि लाउडस्पीकर तेज आवाज में बज रहा था और कार्यक्रम के लिए बड़ी लाइटें बंद थीं, इसलिए किसी ने छात्रा की चीखें नहीं सुनीं और न ही किसी ने उसे गिरते देखा। करीब 10 मिनट तक पानी में तैरने के बाद छात्रा को बचा लिया गया। शुरुआती इलाज का प्रयास किया गया। फिर उसे पास के केपीसी अस्पताल ले जाया गया। तब तक छात्रा की मौत हो चुकी थी। इस घटना के बाद कई सवाल उठने लगे हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, रात में विश्वविद्यालय के अंदर शराब पार्टी हुई थी। मौके से शराब की बोतल बरामद हुई है। सवाल उठ रहे हैं कि छात्रा नशे में थी या नहीं। पोस्टमार्टम के बाद ही पता चलेगा। हालांकि, छात्रा शौचालय की बजाय तालाब की ओर क्यों गई, उसके साथ कोई था या नहीं, ऐसे सवाल उठ रहे हैं। कई लोगों ने यह भी सवाल उठाए हैं कि रात 10 बजे के बाद भी विश्वविद्यालय में बाउल गीत का कार्यक्रम क्यों चल रहा था। पता चला है कि सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए विश्वविद्यालय की बड़ी लाइटें बंद रखी गई थीं। रात 10:05 बजे जब छात्र को झील से निकाला गया, तब कार्यक्रम रोक दिया गया। एम्बुलेंस रात 10:26 बजे केपीसी अस्पताल पहुँची। तब तक छात्र की मौत हो चुकी थी। सवाल यह भी उठता है कि यह घटना सुरक्षा गार्डों के घर के ठीक बगल में हुई। तो विश्वविद्यालय में निगरानी कहाँ है? सीसीटीवी तो लगा है, लेकिन उसका मुँह बाहर की ओर है। पूरे परिसर में सीसीटीवी लगाने का फैसला अभी तक लागू नहीं हुआ है। क्या प्रशासन छात्रों के दबाव में आ गया?

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