मुझे बदनाम करने की राजनीतिक साजिश है। यह सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी का दावा है। 2014 से, वह पेट्रोल के साथ ईंधन के रूप में इथेनॉल के इस्तेमाल की वकालत करते रहे हैं। फिर से, उनके दोनों बेटे इथेनॉल निर्माण कंपनियों के मालिक के रूप में देखे जाते हैं। उनकी एक कंपनी का मुनाफा एक साल में 18 करोड़ रुपये से बढ़कर 523 करोड़ रुपये हो गया है। विपक्ष का आरोप है कि नितिन गडकरी के आक्रामक प्रचार के कारण वर्तमान में पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाया जाता है। हालांकि, पेट्रोल की कीमत कम नहीं हुई है। यानी एक तरफ आम आदमी इथेनॉल मिला पेट्रोल खरीदने को मजबूर हो गया है। हालांकि, पेट्रोल की कीमत पहले की तरह ही वसूली जा रही है। फिर लोगों को 20 प्रतिशत इथेनॉल का लाभ क्यों नहीं मिल रहा है? कुछ लोगों ने इसे लेकर अदालत का दरवाजा भी खटखटाया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया है। नितिन गडकरी ने कहा कि इथेनॉल को लेकर लगाए गए आरोप पैसे के बदले प्रचार करने की साजिश है। यह मुझे बदनाम करने की राजनीतिक साजिश है। लेकिन यह अभियान विफल हो गया है। पेड कैंपेन कौन कर रहा है? नितिन गडकरी ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की। उन्होंने कहा कि आरोप पूरी तरह से झूठे हैं। यह अभियान भी प्रेरित है। बल्कि, इथेनॉल के इस्तेमाल से कार्बन उत्सर्जन की मात्रा कम हो रही है। हमारे देश के किसानों को भी इसका भरपूर लाभ हो रहा है। और पूरी दुनिया ने माना है कि इथेनॉल की वजह से प्रदूषण काफी हद तक कम होता है।
इथेनॉल भ्रष्टाचार पर सड़क एवं परिवहन मंत्री ने कहा, ‘मुझे बदनाम करने की राजनीतिक साजिश चल रही है’