मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार को एक हाथ से इलेक्शन हॉल से बाहर निकाल दिया। इस बार इलेक्शन कमीशन ने मीटिंग को लेकर मुंह खोला है। साफ कर दिया है कि SIR में किसी की दखलअंदाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ममता के आरोपों को खारिज करते हुए कमीशन ने कहा, “कमीशन और चीफ इलेक्शन कमिश्नर को तृणमूल कांग्रेस के MLA खुलेआम धमका रहे हैं। EROs (SDOs/BDOs) के ऑफिस पर हमला किया जा रहा है।” कमीशन ने असल में क्या जानकारी दी है? बयान में कहा गया है, “ममता बनर्जी की लीडरशिप में AITC का डेलीगेशन आज कमिश्नर से मिला। उन्होंने SIR के बारे में कुछ बयान दिए। ज्ञानेश कुमार ने उनके सवालों के जवाब दिए और समझाया। अगर कोई कानून अपने हाथ में लेगा या कानून तोड़ेगा तो सख्त एक्शन लिया जाएगा।” वहीं, ममता के आरोपों को खारिज करते हुए कमीशन ने उल्टा आरोप लगाया कि तृणमूल MLA खुलेआम कमीशन और खासकर चीफ इलेक्शन कमिश्नर के खिलाफ गलत भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं और धमकियां दे रहे हैं। BDO ऑफिस में तोड़फोड़ की घटना हुई है। SIR के काम में लगाए गए अधिकारियों पर कोई दबाव, रुकावट या दखल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वहां यह भी बताया गया है कि 18 हज़ार रुपये में से 7 हज़ार रुपये पहले ही BLOs को दिए जा चुके हैं। यह भी आरोप लगाया गया है कि पश्चिम बंगाल सरकार ने चुनाव आयोग से सलाह किए बिना तीन इलेक्टोरल रोल ऑब्ज़र्वर का ट्रांसफर कर दिया है। चुनाव आयोग ने 27.01.2026 को ट्रांसफर ऑर्डर कैंसिल करने की रिक्वेस्ट की है। हालांकि, यह भी बताया गया है कि अब तक कोई एक्शन नहीं लिया गया है।
आयोग ने ममता को चेतावनी दी, ‘एसआईआर में दखल बर्दाश्त नहीं’