तकनीक की मदद से फर्जी पहचान बनाकर पुलिस पर ही रौब झाड़ने का मामला पश्चिम बंगाल के दमदम से सामने आया है। यहां एक व्यक्ति पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का इस्तेमाल कर पुलिस का फर्जी पहचान पत्र बनाने और खुद को पुलिसकर्मी बताकर ड्यूटी पर तैनात ट्रैफिक पुलिसकर्मियों पर दबाव बनाने का आरोप है। हालांकि, आरोपी की चालाकी ज्यादा देर तक काम नहीं आई। पुलिसकर्मियों को उसकी बातों पर संदेह हुआ और पहचान पत्र की जांच करते ही कथित फर्जीवाड़े का खुलासा हो गया। इसके बाद दमदम थाने की पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी ने फर्जी पहचान पत्र किस मकसद से बनाया था और कहीं इस मामले के पीछे किसी अन्य व्यक्ति या गिरोह की भूमिका तो नहीं है। मिली जानकारी के अनुसार, घटना बीती रात दमदम के बेलघरिया एक्सप्रेसवे स्थित जीरो पॉइंट के पास की है। बताया जा रहा है कि आरोपी घर लौटना चाहता था और इसके लिए उसने निमता ट्रैफिक गार्ड में ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों से गाड़ी का इंतजाम करने की मांग की। इस दौरान उसने खुद को पुलिसकर्मी बताया और अपनी कथित पहचान के आधार पर पुलिसकर्मियों पर दबाव बनाने की कोशिश की। आरोपी का व्यवहार और बातचीत का तरीका ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों को संदिग्ध लगे। उन्हें उसकी बताई गई पहचान पर भरोसा नहीं हुआ। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने उससे अपनी पहचान साबित करने के लिए पहचान पत्र दिखाने को कहा। इसी मांग के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया। पुलिसकर्मियों ने जब आरोपी का पहचान पत्र देखा और उसे स्कैन करके उसकी जांच की, तो कथित तौर पर पता चला कि पहचान पत्र असली नहीं था। शुरुआती जांच में पहचान पत्र के फर्जी होने की बात सामने आने के बाद पुलिसकर्मियों का संदेह और गहरा गया। इसके बाद आरोपी से पहचान पत्र के संबंध में पूछताछ की गई। बताया जा रहा है कि पूछताछ के दौरान आरोपी ने दावा किया कि उसने कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI की मदद से पुलिस का यह पहचान पत्र तैयार किया था। इस खुलासे ने मामले को और गंभीर बना दिया है, क्योंकि इसमें तकनीक के इस्तेमाल से कथित तौर पर फर्जी सरकारी पहचान तैयार करने का पहलू सामने आया है। हालांकि, पहचान पत्र तैयार करने के तरीके और उसकी वास्तविकता से जुड़े सभी तथ्यों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। पहचान पत्र को लेकर संदेह और पूछताछ के बाद मामले की जानकारी दमदम थाने की पुलिस को दी गई। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। जानकारी के मुताबिक, आरोपी को बैरकपुर अदालत में पेश किए जाने की बात कही जा रही है। पुलिस अब इस मामले में आरोपी की भूमिका और उसके कथित फर्जीवाड़े से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आरोपी ने पहचान पत्र केवल खुद को पुलिसकर्मी बताकर रौब दिखाने के लिए बनाया था या इसके पीछे कोई अन्य उद्देश्य भी था। इसके साथ ही यह भी जांच का विषय है कि उसने पहचान पत्र बनाने के लिए किस तरह के साधनों का इस्तेमाल किया और क्या उसने इससे पहले भी इस तरह की कोई गतिविधि की थी। इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आरोपी आखिर पुलिसकर्मी बनकर क्यों घूम रहा था। क्या उसका मकसद केवल ट्रैफिक पुलिसकर्मियों पर दबाव बनाकर गाड़ी का इंतजाम करवाना था या वह किसी दूसरे उद्देश्य से अपनी फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर रहा था? पुलिस इस आशंका की भी जांच कर रही है कि कहीं उसका संबंध जबरन वसूली या किसी अन्य गैरकानूनी गतिविधि से तो नहीं है। इसके अलावा, यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या आरोपी ने अपने स्तर पर पहचान पत्र तैयार किया था या उसे किसी दूसरे व्यक्ति से मदद मिली थी। हालांकि, फिलहाल जबरन वसूली या किसी गिरोह से संबंध होने की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही आरोपी के मकसद और इस मामले से जुड़े अन्य तथ्यों की स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी। इस मामले ने एक बार फिर कृत्रिम बुद्धिमत्ता के गलत इस्तेमाल को लेकर चिंता बढ़ा दी है। AI की मदद से तस्वीरों, दस्तावेजों और अन्य डिजिटल सामग्री में बदलाव करना आसान हो सकता है, लेकिन इसका इस्तेमाल किसी सरकारी अधिकारी की झूठी पहचान बनाने या लोगों पर अनुचित दबाव डालने के लिए करना गंभीर मामला है। ऐसे मामलों में केवल किसी पहचान पत्र को देखकर उस पर भरोसा करने के बजाय उसकी आधिकारिक पुष्टि करना जरूरी हो जाता है। दमदम की इस घटना में भी पुलिसकर्मियों के संदेह और पहचान पत्र की जांच के बाद कथित फर्जीवाड़े का पता चला। अब पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि आरोपी ने इस तकनीक का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया और क्या उसके पास ऐसे अन्य दस्तावेज भी हैं। फिलहाल मामले की जांच जारी है और आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर की जाएगी।
