सबसे बेकार गृह मंत्री, घुसपैठिए मुद्दे पर अमित शाह की नाकामी: अभिषेक बनर्जी

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार सुबह कोलकाता में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अकेले ही सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी की सरकार पर निशाना साधा। आज शाम तृणमूल कांग्रेस के ऑल इंडिया जनरल सेक्रेटरी अभिषेक बनर्जी ने कोलकाता एयरपोर्ट पर पलटवार किया। अभिषेक ने अमित शाह को आज़ादी के बाद भारत का ‘सबसे नाकाम और बेकार गृह मंत्री’ कहा। आज कोलकाता एयरपोर्ट पर मीडिया से रूबरू होते हुए उन्होंने घुसपैठ के मुद्दे पर अमित शाह और BJP की तुलना की। अभिषेक का साफ कहना है कि BJP पिछले 11 साल से केंद्र में सत्ता में है। अमित शाह पिछले 6 साल से गृह मंत्रालय संभाल रहे हैं। इसके बाद भी अगर देश में घुसपैठ की समस्या है, तो इसकी पूरी ज़िम्मेदारी गृह मंत्री की है। इस नाकामी की ज़िम्मेदारी लेते हुए लोकसभा में तृणमूल पार्टी के नेता ने मांग की कि अमित शाह को तुरंत इस्तीफ़ा दे देना चाहिए। आज अमित शाह के बंगाल दौरे और घुसपैठ वाले कमेंट्स का कड़ा जवाब देते हुए अभिषेक ने BJP के अंदरूनी मामलों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा, “मुझे या ममता बनर्जी को घुसपैठ के बारे में ज्ञान देने से पहले, अमित शाह को अपनी पार्टी के सांसदों की बात सुननी चाहिए। BJP के राज्यसभा सांसद अनंत महाराज ने खुद देश के गृह मंत्री को ‘सबसे बड़ा घुसपैठिया’ और ‘पाकिस्तानी’ कहा था। यह मेरी राय नहीं है, बल्कि BJP के चुने हुए प्रतिनिधियों की राय है।” उन्होंने रानाघाट के सांसद जगन्नाथ सरकार के मुद्दे का भी ज़िक्र किया। अभिषेक जानते थे कि जगन्नाथ सरकार ने दावा किया था कि अगर BJP सत्ता में आई तो बॉर्डर या सीमाओं का कोई कॉन्सेप्ट नहीं रहेगा। ऐसे कमेंट करने के बाद भी उन पर कोई एक्शन क्यों नहीं लिया गया या उन्हें कारण बताओ नोटिस क्यों नहीं दिया गया? डायमंड हार्बर के सांसद ने यह सवाल उठाकर अमित शाह को चुनौती दी। अभिषेक ने बॉर्डर सिक्योरिटी और इंटरनल सिक्योरिटी में होम मिनिस्ट्री की भूमिका पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “दिल्ली में इजरायली दूतावास के सामने धमाका हुआ, जम्मू-कश्मीर में दिनदहाड़े मिलिटेंट्स ने 26 लोगों को मार डाला। इसके लिए कौन जिम्मेदार है? दिल्ली पुलिस से लेकर BSF तक, सब होम मिनिस्ट्री के अंडर हैं। बॉर्डर पर BSF का अधिकार क्षेत्र 15 किलोमीटर से बढ़ाकर 50 किलोमीटर कर दिया गया है। फिर भी घुसपैठ क्यों नहीं रोकी जा रही है?” उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “चुनाव से पहले नेता माइग्रेटरी बर्ड्स की तरह बंगाल आ रहे हैं, लेकिन उन्हें मणिपुर या देश की सिक्योरिटी की कोई चिंता नहीं है।” आज उन्होंने सिर्फ पॉलिटिकल अटैक ही नहीं किया, बल्कि अमित शाह के बंगाल और बंगाली कल्चर के ज्ञान पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि अमित शाह ने रवींद्रनाथ टैगोर को ‘रवींद्रनाथ सान्याल’ कहा, जो वर्ल्ड पोएट का नाम नहीं जानते, उनकी जन्मभूमि नहीं जानते, वे क्या ‘गोल्डन बंगाल’ बनाएंगे! असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का ज़िक्र करते हुए अभिषेक ने कहा, “असम में कहा जाता है कि अगर आप बंगाली बोलेंगे, तो आपको जेल भेज दिया जाएगा। लेकिन अमित शाह उनके बगल में बैठकर राजनीति कर रहे हैं।” दूसरे राज्यों में बंगालियों की बुरी हालत पर रोशनी डालते हुए उन्होंने दक्षिण दिनाजपुर के दो BJP बूथ प्रेसिडेंट – असित सरकार और गौतम वर्मा का उदाहरण दिया। अभिषेक ने कहा कि उन्हें महाराष्ट्र में सिर्फ़ बंगाली बोलने के लिए जेल जाना पड़ा और उस समय BJP के प्रदेश प्रेसिडेंट सुकांत मजूमदार उनके साथ खड़े नहीं हुए। अभिषेक ने आम लोगों को स्पेशल रिवीजन ऑफ़ वोटर लिस्ट (SIR) के नाम पर परेशान करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि मतुआ लोगों को नागरिकता का झूठा लालच दिया जा रहा है। उन्होंने इलेक्शन कमीशन को चुनौती दी कि जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से बाहर हैं, उनकी लिस्ट जारी करे और साबित करे कि वे बांग्लादेशी या रोहिंग्या हैं। आखिर में, बंगाल की तुलना दिल्ली के प्रदूषण की स्थिति से करते हुए अभिषेक ने कहा कि बंगाल की हवा दिल्ली की हवा से कहीं ज़्यादा साफ़ है। लोग यहाँ आज़ादी से साँस ले सकते हैं। इसलिए, बंगाल की हवा दिल्ली की हवा से कहीं ज़्यादा साफ़ है। लोगों को गुमराह करने से कोई फ़ायदा नहीं होगा।

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