‘क्या आप यहां पब्लिसिटी के लिए आए थे?’, सुप्रीम कोर्ट ने बिहार चुनाव को लेकर किशोर की याचिका खारिज की

जन सुराज पार्टी के चीफ प्रशांत किशोर ने बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। किशोर की पार्टी ने दावा किया था कि चुनाव से पहले एक खास प्रोजेक्ट के लिए महिलाओं के अकाउंट में 10,000 रुपये का पेमेंट करना मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन है। देश की टॉप कोर्ट ने शुक्रवार को किशोर की याचिका खारिज कर दी। केस बिहार हाई कोर्ट भेज दिया गया है। जन सुराज ने दावा किया था कि बिहार की रूलिंग पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) और भारतीय जनता पार्टी के अलायंस ने मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट लागू रहने के दौरान हर परिवार की एक महिला को 10,000 रुपये बांटे गए, जिससे फ्री और फेयर चुनाव का सिद्धांत कमजोर हुआ। किशोर की पार्टी ने चुनाव कैंसिल करने की भी रिक्वेस्ट की। जन सुराज की तरफ से दलील देते हुए वकील सीयू सिंह ने कहा, “मैं सिर्फ करप्ट प्रैक्टिस की बात नहीं कर रहा हूं… मैं पूरे राज्य में मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट के उल्लंघन की भी बात कर रहा हूं।” उस दिन सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने जवाब दिया, ‘आपकी पार्टी को कितने वोट मिले? लोगों ने आपको रिजेक्ट कर दिया है और आप पब्लिसिटी पाने के लिए इस कोर्ट का इस्तेमाल कर रहे हैं?’ जस्टिस जयमाल्य बागची ने जन सुराज पार्टी के वकील से पूछा, ‘आप ऐसा कैसे कह सकते हैं? अगर आप पावर में आए तो आप भी यही करेंगे।’ इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने जन सुराज की पिटीशन बिहार हाई कोर्ट भेज दी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह पूरे देश का मामला नहीं है। बिहार में एक हाई कोर्ट है, जहां इस केस की सुनवाई होगी।

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