100 दिन के काम की स्कीम से महात्मा गांधी का नाम हटाने के विरोध में राज्य सरकार ने अपनी स्कीम में भी ‘बापू’ नाम जोड़ दिया। राज्य की ‘कर्मश्री’ स्कीम का नाम बदलकर ‘महात्माश्री’ कर दिया गया। इस बार राज्य के अंतरिम बजट में उस स्कीम के लिए अलॉटमेंट बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है। फाइनेंस मिनिस्टर चंद्रिमा भट्टाचार्य ने 100 दिन के काम के लिए 2000 करोड़ रुपये के अलॉटमेंट का प्रस्ताव रखा। कहने की ज़रूरत नहीं है कि इससे और भी कई मज़दूरों और किसानों को फ़ायदा होगा। अंतरिम बजट में इस घोषणा से ग्रामीण बंगाल में हलचल मच गई है। 26 तारीख़ के चुनाव से पहले इस प्रस्ताव का दूर-दराज़ के इलाकों में ज़रूर बड़ा असर पड़ेगा। यह भी ध्यान देने वाली बात है कि पिछले रविवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट में 100 दिन के काम ‘वीबी जीरामजी’ स्कीम के लिए कोई घोषणा नहीं की। ग्रामीण इलाकों में गरीबों को रोज़गार देने के लिए 100 दिन के काम की स्कीम बहुत ज़रूरी है। उस स्कीम का नाम बदलने को लेकर संसद के शीतकालीन सत्र में भी कम उत्साह नहीं था। स्कीम के नाम से ‘महात्मा गांधी’ हटाकर ‘राम’ नाम लाया गया है। इस पर विपक्ष के कड़े एतराज़ पर ध्यान नहीं दिया गया। विरोध में राज्य सरकार ने अपनी 100 दिन की काम वाली स्कीम का नाम भी बदल दिया। राज्य की ‘कर्मश्री’ स्कीम का नाम गवर्नर की मंज़ूरी से ‘महात्माश्री’ कर दिया गया है। यह नया नाम पिछले दिसंबर में लागू हुआ था। इसमें काम के दिनों में बढ़ोतरी का भी ज़िक्र है।
चुनाव से पहले मास्टरस्टॉक! अंतरिम बजट में 100 दिन के काम के लिए 2000 करोड़ रुपये आवंटित