पिछले शुक्रवार को IPAC केस की सुनवाई में बहुत ज़्यादा अफ़रा-तफ़री मच गई थी। जज को सुनवाई के बीच में ही कुर्सी छोड़नी पड़ी थी। ऐसे में बुधवार को केस की सुनवाई फिर से शुरू हुई है। ED और तृणमूल की तरफ़ से फ़ाइल किए गए केस की सुनवाई जस्टिस शुभ्रा घोष की कोर्ट में एक साथ शुरू हुई। IPAC केस की सुनवाई के दौरान कोई भी बाहरी, अनचाहे लोग कोर्ट में मौजूद नहीं रह सकेंगे। यह ऑर्डर मंगलवार को दिया गया था। इतना ही नहीं, यह भी ऑर्डर दिया गया था कि केस की लाइव-स्ट्रीमिंग की जाएगी। उसी ऑर्डर के हिसाब से सुनवाई हुई। प्रतीक जैन के लाउडन स्ट्रीट वाले घर या साल्ट लेक वाले IPAC ऑफ़िस से कुछ भी ज़ब्त नहीं किया गया। जो कुछ भी था, ममता बनर्जी ने छीन लिया है। ED ने कोर्ट को बताया। दूसरी तरफ़, तृणमूल ने कहा कि अगर यह दावा सच है, तो वे केस वापस लेने को तैयार हैं। हालांकि, तृणमूल के वकील ने ED का स्टेटमेंट रिकॉर्ड करने की मांग की। पता चला है कि उसके बाद दोनों पार्टियों के स्टेटमेंट रिकॉर्ड किए गए। ED ने यह सर्च ऑपरेशन PML के सेक्शन 17 के तहत किया है। ED ने कुछ भी ज़ब्त नहीं किया है। ममता बनर्जी ने सारे डॉक्यूमेंट्स छीन लिए हैं। इसलिए, जिन डॉक्यूमेंट्स के चोरी होने का आरोप तृणमूल लगा रही है, वे मंज़ूर नहीं हैं। वहीं, ED के वकील, एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने केस की मंज़ूरी पर सवाल उठाया है।