US कोस्ट गार्ड ने नॉर्थ अटलांटिक में एक स्टिंग ऑपरेशन में रूस के झंडे वाला एक बड़ा तेल टैंकर ज़ब्त किया है। बुधवार को हुए इस ऑपरेशन में ब्रिटिश सेना ने सीधे हवाई और समुद्री मदद दी। मैरिनेरा नाम के इस जहाज़ को रूस, ईरान और वेनेज़ुएला को तेल की तस्करी करने के आरोप में ज़ब्त किया गया था, जो इंटरनेशनल बैन का उल्लंघन था। पता चला है कि वेनेज़ुएला से जुड़ा यह जहाज़, जिसे पहले बेला 1 के नाम से जाना जाता था, आइसलैंड और स्कॉटलैंड के बीच पानी के रास्ते से उत्तर की ओर जाते समय ज़ब्त किया गया था। ब्रिटिश डिफेंस सेक्रेटरी जॉन हीली ने कहा कि यूनाइटेड स्टेट्स के कहने पर रॉयल एयर फोर्स (RAF) के सर्विलांस एयरक्राफ्ट और रॉयल नेवी के सपोर्ट शिप RFA टाइडफोर्स ने इस ऑपरेशन में हिस्सा लिया। हालांकि कोई भी ब्रिटिश कर्मचारी सीधे जहाज़ पर नहीं था, लेकिन पूरे ऑपरेशन के दौरान उनका स्ट्रेटेजिक सपोर्ट बहुत अच्छा था।
इंटरनेशनल डिप्लोमेसी और ट्रंप-स्टारमर कॉल
ऑपरेशन के तुरंत बाद ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर और US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने फोन पर बात की। डाउनिंग स्ट्रीट के एक प्रवक्ता ने कहा कि दोनों नेताओं ने वेनेज़ुएला के हालात और यूक्रेन में युद्ध पर लंबी बातचीत की। स्टार्मर ने ट्रंप को वेनेज़ुएला के प्रेसिडेंट निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद के हालात और ग्रीनलैंड पर ब्रिटेन के रुख के बारे में जानकारी दी।
रूस का कड़ा रिएक्शन
मॉस्को ने अपने झंडे वाले जहाज़ को रोके जाने पर कड़ा गुस्सा जताया है। रूसी ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री का दावा है कि उसने कुछ समय के लिए जहाज़ पर रूसी झंडा लगाने की इजाज़त दी थी। उनका दावा है कि किसी भी देश को दूसरे देश में रजिस्टर्ड जहाज़ों के खिलाफ़ ताकत इस्तेमाल करने का हक नहीं है। हालांकि, US इंटेलिजेंस के मुताबिक, इस ‘स्टेटलेस’ या झूठे झंडे वाले जहाज़ की तलाशी इंटरनेशनल कानून के हिसाब से की गई थी।
