पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के प्रसिद्ध तारापीठ मंदिर में करीब 40 दिनों के लंबे इंतजार के बाद मां तारा अपने मूल स्थान यानी मुख्य मंदिर के गर्भगृह में लौट आई हैं। रविवार की रात कोजागरी लक्ष्मी पूजा के पावन अवसर पर नवीनीकरण के बाद तैयार गर्भगृह में मां तारा को दोबारा विराजमान कराया गया। इस दौरान देवी को राजसी वेशभूषा में सजाया गया था। मां तारा की वापसी की खबर से श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिला। लंबे समय से भक्त अपनी आराध्य देवी के मूल गर्भगृह में दर्शन करने का इंतजार कर रहे थे। देवी के दोबारा अपने स्थान पर विराजमान होने के साथ ही भक्तों का यह इंतजार समाप्त हो गया। मंदिर में इस अवसर को विशेष धार्मिक महत्व के रूप में देखा जा रहा है। तारापीठ मंदिर के मुख्य गर्भगृह में नवीनीकरण का काम शुरू होने के कारण 14 सितंबर को मां तारा को उनके मूल स्थान से हटाया गया था। कौशिकी अमावस्या के दो दिन बाद देवी को मंदिर के सामने स्थित शिव मंदिर में स्थापित किया गया था। इसके बाद से ही शिव मंदिर में मां तारा की नियमित पूजा-अर्चना की जा रही थी। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु इसी स्थान पर पहुंचकर देवी के दर्शन कर रहे थे। मंदिर प्रबंधन का उद्देश्य मुख्य गर्भगृह में नवीनीकरण का काम पूरा कराकर देवी को फिर से उनके मूल स्थान पर विराजमान कराना था। इसी वजह से भक्तों को कुछ समय तक वैकल्पिक स्थान पर दर्शन करने पड़े। अब नवीनीकरण का काम पूरा होने के बाद मां तारा की मुख्य गर्भगृह में वापसी हो गई है। मंदिर प्रबंधन की शुरुआती योजना के अनुसार मां तारा को महालया से पहले ही मुख्य गर्भगृह में वापस विराजमान कराया जाना था। हालांकि, नवीनीकरण का काम निर्धारित समय पर पूरा नहीं हो पाने के कारण यह योजना सफल नहीं हो सकी। इसके बाद श्रद्धालुओं को उम्मीद थी कि दुर्गापूजा की षष्ठी तिथि पर देवी की वापसी हो जाएगी। लेकिन उस समय भी मां तारा को उनके मूल स्थान पर स्थापित नहीं किया जा सका। इसके कारण भक्तों को अपनी आराध्य देवी के मुख्य गर्भगृह में दर्शन के लिए और इंतजार करना पड़ा। इस बीच मंदिर में नियमित पूजा-अर्चना जारी रही और श्रद्धालु शिव मंदिर में जाकर मां तारा के दर्शन करते रहे। आखिरकार कोजागरी लक्ष्मी पूजा के अवसर पर देवी की वापसी का रास्ता साफ हुआ। रविवार की रात कोजागरी लक्ष्मी पूजा के पावन अवसर पर मां तारा को नवीनीकरण के बाद तैयार मुख्य गर्भगृह में दोबारा विराजमान कराया गया। राजसी वेशभूषा में सुसज्जित देवी के दर्शन को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह रहा। करीब 40 दिनों बाद मां तारा को उनके मूल स्थान पर देखकर भक्तों की आस्था और खुशी का विशेष नजारा देखने को मिला। तारापीठ मंदिर पश्चिम बंगाल के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है, जहां सालभर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में मां तारा की मुख्य गर्भगृह में वापसी मंदिर से जुड़े भक्तों के लिए महत्वपूर्ण अवसर बन गई। कोजागरी लक्ष्मी पूजा के दिन देवी के दोबारा अपने मूल स्थान पर विराजमान होने से धार्मिक उत्सव का महत्व भी बढ़ गया। इस तरह लंबे इंतजार के बाद तारापीठ में मां तारा के मूल गर्भगृह में दर्शन का सिलसिला फिर से शुरू हो गया।
