कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के बेटे और फोटोग्राफर रायहान वाड्रा की दिल्ली में आयोजित फोटो प्रदर्शनी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि राजस्थान सरकार के अधीन संचालित बीकानेर हाउस में लगी उनकी प्रदर्शनी से युवा आंदोलनों और विरोध-प्रदर्शनों को दिखाने वाली दर्जनों तस्वीरें उद्घाटन से कुछ घंटे पहले हटा दी गईं। इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठाए हैं। रायहान वाड्रा की फोटो प्रदर्शनी का नाम ‘नो आइडिया इज फाइनल’ (No Idea Is Final) है। रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदर्शनी में कुल 105 तस्वीरें लगाने की योजना थी, लेकिन प्रबंधन की आपत्तियों के बाद 74 तस्वीरें हटा दी गईं। इनमें दिल्ली में हाल के महीनों में हुए युवा आंदोलनों और विरोध-प्रदर्शनों को कैमरे में कैद करने वाली तस्वीरें शामिल थीं। रायहान के मुताबिक, प्रदर्शनी के प्रस्ताव और तस्वीरों का लेआउट पहले ही प्रबंधन के साथ साझा किया गया था। इसके बावजूद, कार्यक्रम से ठीक पहले तस्वीरों की राजनीतिक प्रकृति और मौजूदा परिस्थितियों का हवाला देते हुए उन्हें हटाने के लिए कहा गया। उन्होंने इस फैसले पर निराशा जताते हुए कहा कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विरोध में संदेश देना नहीं, बल्कि देश में चल रहे आंदोलनों का दृश्य दस्तावेज तैयार करना था। रायहान ने यह भी दावा किया कि उनसे भारतीय राष्ट्रीय ध्वज यानी तिरंगे की दो तस्वीरें हटाने को कहा गया था। उन्होंने शुरुआत में इन तस्वीरों को हटाने से इनकार किया। हालांकि, उनके अनुसार, बाद में एक तस्वीर उनके वहां मौजूद नहीं रहने के दौरान हटा दी गई। इस मुद्दे ने विवाद को और गंभीर बना दिया और कलात्मक स्वतंत्रता को लेकर बहस तेज हो गई। प्रियंका गांधी वाड्रा ने अपने बेटे का समर्थन करते हुए कहा कि जब सत्ता में बैठे लोग दूसरों की अभिव्यक्ति से डरने लगते हैं, तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने रायहान के काम पर गर्व जताया। वहीं, कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने तस्वीरें हटाए जाने की आलोचना करते हुए सवाल किया कि विरोध-प्रदर्शनों का दस्तावेजीकरण करने वाली तस्वीरों में आपत्तिजनक क्या था। कांग्रेस ने इस घटना को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर देखा है। रायहान के अनुसार, उन्हें तस्वीरें हटाने के लिए आयोजन स्थल की बुकिंग नीति का हवाला देते हुए लिखित निर्देश दिया गया था। मीडिया रिपोर्टों में यह भी बताया गया कि प्रबंधन ने राजनीतिक सामग्री को लेकर आपत्ति जताई। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, बीकानेर हाउस प्रशासन की ओर से इस विवाद पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। इसलिए तस्वीरें हटाने के फैसले के पीछे प्रबंधन का पक्ष पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। विवाद के बावजूद प्रदर्शनी को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी रखने की बात कही गई है। रिपोर्टों के अनुसार, इसमें लगभग 40 तस्वीरें प्रदर्शित हो रही हैं और प्रदर्शनी 25 अक्टूबर तक चलने वाली है। रायहान ने हटाई गई तस्वीरों को किसी अन्य स्थान पर प्रदर्शित करने की योजना भी जताई है। इस पूरे मामले ने कला, राजनीतिक माहौल और कलाकारों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
