जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और तिरंगा फहराने के मामले में तिहाड़ जेल से रिहा होने के कुछ ही घंटे बाद ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने पूछताछ के लिए समन जारी किया है। पार्टी के एक अन्य नेता अजिंक्य शिंदे को भी पेश होने के लिए कहा गया है। तीनों को गुरुवार, 22 अक्टूबर को दिल्ली के राजौरी गार्डन स्थित क्राइम ब्रांच कार्यालय में बुलाया गया है। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब जंतर-मंतर से जुड़े दोनों मामलों की जांच दिल्ली पुलिस की स्थानीय इकाइयों से क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है। पुलिस के मुताबिक, जांच का संबंध कथित अनधिकृत प्रवेश, सरकारी आदेश की अवहेलना और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं से है। सौरव दास और आशुतोष रांका को 21 अक्टूबर को विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद तिहाड़ जेल से रिहा किया गया। दोनों 14 अक्टूबर से न्यायिक हिरासत में थे। शुरुआत में उन्हें पांच दिन की हिरासत में भेजा गया था, जिसे बाद में दो दिन के लिए बढ़ा दिया गया। इस तरह उन्होंने कुल सात दिन हिरासत में बिताए। रिहाई के दौरान दोनों नेताओं ने शांति बनाए रखने और कानून का पालन करने संबंधी लिखित आश्वासन दिया। उन्होंने यह भी कहा कि जंतर-मंतर को कानूनी प्रक्रिया के तहत फिर से अधिसूचित किए जाने तक वहां विरोध प्रदर्शन का आह्वान नहीं करेंगे। अदालत ने व्यक्तिगत और जमानती मुचलके स्वीकार करने के बाद उनकी रिहाई का आदेश दिया। दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर से जुड़े दोनों मामलों की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी है। इनमें एक मामला कथित अनधिकृत प्रवेश से जुड़ा है, जबकि दूसरे में प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा कर्मियों के साथ कथित तौर पर हुई घटना की जांच की जा रही है। पुलिस के अनुसार, 13 अक्टूबर को CJP के सदस्य जंतर-मंतर पहुंचे थे। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड पार कर उस स्थान में प्रवेश किया, जिसे विरोध प्रदर्शन के निर्धारित स्थल के रूप में अधिसूचित नहीं किया गया था। पुलिस ने इस घटनाक्रम के बाद 14 लोगों को हिरासत में लिया था और दो एफआईआर दर्ज की थीं। मामले में सरकारी आदेश की कथित अवहेलना और अनधिकृत प्रवेश से संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत जांच की जा रही है। हालांकि, जांच क्राइम ब्रांच को सौंपे जाने का अर्थ यह नहीं है कि आरोप साबित हो गए हैं। मामले में संबंधित पक्षों का पक्ष और जांच के निष्कर्ष आगे की कानूनी प्रक्रिया में अहम होंगे। यह मामला 13 अक्टूबर को CJP के ‘लेहरा दो तिरंगा’ विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। पार्टी के नेताओं ने जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े मुद्दों पर विरोध जताया था। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारी बैरिकेड पार करके वहां पहुंचे, जबकि पार्टी नेताओं ने इसे अपने विरोध प्रदर्शन का हिस्सा बताया। इस घटनाक्रम के बाद नेताओं को हिरासत में लिया गया और शांति बनाए रखने से संबंधित पहले दिए गए आश्वासनों के उल्लंघन का मुद्दा भी उठा। बाद में उनकी न्यायिक हिरासत बढ़ाई गई, जिसके खिलाफ उन्होंने अदालत का रुख किया था। 21 अक्टूबर को रिहाई के बाद अब क्राइम ब्रांच ने उन्हें नए सिरे से पूछताछ के लिए बुलाया है। क्राइम ब्रांच की पूछताछ में पुलिस जंतर-मंतर तक पहुंचने की परिस्थितियों और दर्ज मामलों से जुड़े पहलुओं की जांच करेगी। हालांकि, प्रदर्शन की कथित योजना, फंडिंग या किसी संगठित नेटवर्क को लेकर जांच एजेंसी के निष्कर्ष अभी सामने नहीं आए हैं। ऐसे में इन बिंदुओं को स्थापित तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा। CJP नेताओं के समन और दोनों एफआईआर के क्राइम ब्रांच को हस्तांतरण से यह मामला एक बार फिर चर्चा में है। अब जांच में सामने आने वाले तथ्यों और आगे की कानूनी कार्रवाई पर नजर रहेगी।
