अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर महत्वपूर्ण खुलासा किया। उन्होंने कहा कि दोनों देश समझौते के काफी करीब पहुंच चुके हैं और भारत भी इस दिशा में सकारात्मक रुख अपना रहा है। ट्रंप ने जोर देकर बताया कि वे समझौता करना चाहते हैं और अमेरिका भी पूरी तैयारी के साथ आगे बढ़ रहा है। उनका यह बयान ऐसे समय आया जब दोनों देशों के बीच व्यापारिक वार्ताएं नई ऊंचाई पर पहुंच रही हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह समझौता पहले किए गए कई समझौतों से बिल्कुल अलग किस्म का होगा। ट्रंप के इन शब्दों ने अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक हलकों में चर्चा का नया दौर शुरू कर दिया है क्योंकि अमेरिका की मौजूदा व्यापार नीति में टैरिफ संबंधी बदलावों के कारण कई समझौतों पर पुनर्विचार हो रहा है। ट्रंप ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि प्रस्तावित व्यापार समझौता पारंपरिक ढांचे से हटकर होगा। उन्होंने संकेत दिया कि इसमें व्यापार के अलावा ऊर्जा, तकनीक और रक्षा जैसे क्षेत्रों को भी व्यापक रूप से शामिल किया जा सकता है। अमेरिका में टैरिफ नीतियों में आए बदलावों के कारण पहले चरण की रूपरेखा पर फिर से बातचीत चल रही है। फरवरी में दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण की रूपरेखा को अंतिम रूप देने की घोषणा की थी, लेकिन बाद की परिस्थितियों ने प्रक्रिया को नया मोड़ दिया। ट्रंप के बयान से साफ है कि दोनों पक्ष अब अधिक व्यावहारिक और दूरगामी समझौते की ओर बढ़ रहे हैं जिसमें पारस्परिक हितों का संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया जाएगा। यह विकास दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए दीर्घकालिक लाभकारी साबित हो सकता है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भारत के दौरे पर हैं और उन्होंने विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ विस्तृत वार्ता की। इस मुलाकात में व्यापार के साथ-साथ ऊर्जा, तकनीक, रक्षा और जन-जन के बीच संबंधों को मजबूत करने पर खास ध्यान दिया गया। रुबियो ने द्विपक्षीय रिश्तों को नई ऊंचाई पर ले जाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका भारत के साथ दीर्घकालिक साझेदारी चाहता है जिसमें आर्थिक सहयोग के साथ रणनीतिक आयाम भी शामिल हों। इस दौरे के दौरान दोनों पक्षों ने मौजूदा चुनौतियों और संभावनाओं पर खुलकर चर्चा की। रुबियो के भारत आगमन ने ट्रंप के बयान को और अधिक महत्व प्रदान किया है क्योंकि यह उच्च स्तरीय संवाद का हिस्सा है। इस महीने की शुरुआत में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल मिल्वौकी और वाशिंगटन में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर से मिले थे। दोनों नेताओं ने व्यापार समझौते के बारीक पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की थी। यह बैठकें समझौते को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हुईं। अमेरिका में टैरिफ संबंधी नई स्थितियों के कारण वार्ता प्रक्रिया में कुछ परिवर्तन आए हैं, लेकिन दोनों पक्ष इसे सकारात्मक मोड़ देने में जुटे हुए हैं। भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने की इच्छा दोनों तरफ साफ दिखाई दे रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि यह समझौता सफलतापूर्वक संपन्न होता है तो यह वैश्विक व्यापार व्यवस्था में भी नई मिसाल पेश कर सकता है। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एस जयशंकर के साथ बैठक के बाद भारत को तेल रिफाइनरी क्षेत्र की महाशक्ति बताया। उन्होंने कहा कि भारत ने अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की इच्छा बार-बार जताई है और इस दिशा में उल्लेखनीय प्रगति भी हुई है। रुबियो ने स्पष्ट किया कि अमेरिका भी भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने का अच्छा स्रोत बन सकता है। दोनों देशों के बीच ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर गंभीर चर्चा हुई। उन्होंने भारत से ऊर्जा क्षेत्र में साझेदारी बढ़ाने और अमेरिकी तकनीक खरीदने की अपील भी की। रुबियो के इन शब्दों से साफ है कि अमेरिका भारत की ऊर्जा सुरक्षा में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
