यूट्यूबर ध्रुव राठी ने पुलिस हिरासत से रिहा होने के बाद एक वीडियो जारी कर अपने साथ हुई कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सादे कपड़ों में आए लोगों ने उनकी मां को धक्का देकर गुरुग्राम स्थित उनके घर में प्रवेश किया और उन्हें सोते समय बेडरूम से जबरन बाहर ले गए। ध्रुव ने इस घटना को गिरफ्तारी या हिरासत के बजाय ‘अपहरण’ करार दिया। वीडियो में उन्होंने अपना भारतीय पासपोर्ट दिखाकर नागरिकता को लेकर उठ रहे सवालों का भी जवाब दिया। ध्रुव राठी के अनुसार, 10 अक्टूबर की सुबह करीब 7 बजे वह अपने गुरुग्राम स्थित आवास पर सो रहे थे। इसी दौरान कई लोग उनके घर पहुंचे। उन्होंने दावा किया कि उनकी मां ने दरवाजा खोला, जिसके बाद सादे कपड़ों में मौजूद लोग उन्हें धक्का देकर घर के अंदर घुस गए। इसके बाद वे सीधे उनके बेडरूम तक पहुंचे और उन्हें उठाकर बाहर ले गए। ध्रुव का आरोप है कि उन्हें यह समझने का मौका तक नहीं मिला कि आखिर उनके घर कौन आया है और उन्हें कहां ले जाया जा रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें चप्पल पहनने तक का समय नहीं दिया गया। उनके मुताबिक, इस दौरान उन्हें चोटें आईं और उनके माता-पिता के साथ भी कथित तौर पर धक्का-मुक्की की गई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। रिहाई के बाद जारी वीडियो में ध्रुव राठी ने कहा कि वह इस कार्रवाई को सामान्य पुलिस हिरासत नहीं मानते। उनका आरोप है कि करीब 22 से 23 घंटे तक उन्हें अलग-अलग पुलिस थानों में रखा गया। इस दौरान उन्हें फोन इस्तेमाल करने और अपने वकील से बात करने की अनुमति नहीं दी गई। ध्रुव ने कहा कि अगर पुलिसकर्मी वर्दी में आते, अपनी पहचान बताते और कार्रवाई का कारण स्पष्ट करते, तो वह उनके साथ जाने को तैयार थे। लेकिन उनके मुताबिक, जिस तरीके से उन्हें घर से ले जाया गया, वह कानूनी प्रक्रिया के बजाय जबरन उठाए जाने जैसा था। यह घटना को लेकर ध्रुव राठी का पक्ष है; कार्रवाई की परिस्थितियों पर पुलिस का आधिकारिक पक्ष उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट नहीं है। ध्रुव राठी ने अपने वीडियो में भारतीय पासपोर्ट दिखाते हुए नागरिकता को लेकर फैल रही चर्चाओं पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह भारतीय नागरिक हैं और आगे भी भारतीय नागरिक बने रहेंगे। उनका कहना है कि उनकी राष्ट्रीयता को लेकर गलत जानकारी प्रसारित की जा रही है और इसे उनके खिलाफ की गई कार्रवाई से जोड़कर देखा जाना चाहिए। ध्रुव ने यह भी कहा कि भारतीय नागरिक होने के नाते उन्हें दूसरे नागरिकों की तरह अपने विचार रखने और लोकतांत्रिक गतिविधियों में हिस्सा लेने का अधिकार है। उन्होंने उन खबरों को भी खारिज किया, जिनमें दावा किया जा रहा था कि उन्होंने आगे किसी प्रदर्शन में शामिल नहीं होने का लिखित आश्वासन दिया है। ध्रुव राठी को 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित कॉकroach जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन से पहले गुरुग्राम स्थित उनके आवास से हिरासत में लिया गया था। इस प्रदर्शन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जानी थी। चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे भी इस विरोध प्रदर्शन के केंद्र में थे। रिपोर्टों के अनुसार, दिल्ली में प्रदर्शन को लेकर प्रतिबंधात्मक आदेश लागू थे और पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर पहुंचने से रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की थी। इसी दौरान CJP से जुड़े कुछ नेताओं को भी हिरासत में लिया गया। ध्रुव राठी को शनिवार देर रात रिहा कर दिया गया था। ध्रुव राठी ने अपनी हिरासत को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में असहमति की आवाज उठाने वालों को दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने मौजूदा परिस्थितियों को ‘अघोषित आपातकाल’ बताते हुए लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर चिंता जताई। ध्रुव ने कहा कि यदि उनके साथ इस तरह की कार्रवाई हो सकती है, तो दूसरे लोगों के साथ भी ऐसा होने की आशंका है। हालांकि, सरकार और पुलिस की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया के बिना घटना के सभी पहलुओं की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
