पश्चिम बंगाल की रेजीनगर विधानसभा सीट पर मंगलवार को हुए उप-चुनाव के ठीक एक दिन बाद वरिष्ठ राजनीतिज्ञ और आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के अध्यक्ष हुमायूं कबीर ने एक बड़ा और चौंकाने वाला फैसला लिया है। बुधवार सुबह एक विशेष साक्षात्कार के दौरान हुमायूं कबीर रो पड़े और उन्होंने सक्रिय राजनीति से स्वैच्छिक संन्यास (रिटायरमेंट) की घोषणा कर दी। इसके साथ ही उन्होंने कसम खाई है कि शुभेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री रहते वे कभी राज्य विधानसभा के सत्रों में कदम नहीं रखेंगे। कबीर ने बताया कि वे नौदा विधानसभा के विधायक पद से इस्तीफे को लेकर जल्द ही जनता की राय लेने वाले हैं। उल्लेखनीय है कि 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हुमायूं कबीर ने नौदा और रेजीनगर, दोनों सीटों से जीत दर्ज की थी। बाद में नियम के तहत उन्होंने रेजीनगर सीट से इस्तीफा दे दिया था, जिसके चलते मंगलवार को वहां उप-चुनाव कराया गया। हालांकि, मंगलवार को मतदान शुरू होने के महज एक घंटे के भीतर ही पुलिस ने ‘कानून तोड़ने’ का आरोप लगाते हुए उन्हें रेजीनगर पार्टी दफ्तर के बाहर से हिरासत में ले लिया था। करीब 12 घंटे तक पुलिस हिरासत में रहने के बाद रात 8 बजे उन्हें छोड़ा गया। इस कार्रवाई से खुद को बेहद अपमानित महसूस कर रहे हुमायूं कबीर ने बुधवार को राजनीति से हटने के फैसले की घोषणा की। आजकाल (Aajkaal.in) को दिए विशेष साक्षात्कार में भावुक कबीर ने कहा, “जिस लोकतांत्रिक व्यवस्था में बिना किसी ठोस वजह के पुलिस का एक सब-इंस्पेक्टर किसी चुने हुए विधायक को जबरन उठाकर 12 घंटे तक हिरासत में रख सकता है, मैं उस लोकतंत्र से नफरत करता हूं और ऐसे पुलिस मंत्री को नजरअंदाज करना चाहता हूं।” उन्होंने आरोप लगाया कि बीते दो महीनों से रेजीनगर की जनता पर पुलिस द्वारा जो कथित अत्याचार किया गया, वे उसके विरोध में यह कदम उठा रहे हैं। हुमायूं कबीर ने स्पष्ट किया कि वे शुभेंदु अधिकारी जैसे पुलिस मंत्री की दया पर राजनीति नहीं करेंगे। उन्होंने घोषणा की कि वे स्टैंडिंग कमेटी (अल्पसंख्यक मामले और हाउस कमेटी), बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC), सर्वदलीय बैठकों (All-Party Meetings) और स्पीकर द्वारा बुलाई गई किसी भी बैठक में हिस्सा नहीं लेंगे। उन्होंने कहा, “विधानसभा में मेरे लिए आरक्षित 88 नंबर सीट पर अब मैं कभी नहीं दिखूंगा। मैं विधानसभा के भीतर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का आमना-सामना नहीं करना चाहता।” अपनी व्यथा सुनाते हुए कबीर ने कहा कि एक पंजीकृत राजनीतिक दल का अध्यक्ष अपने ही पार्टी कार्यालय में सुरक्षित नहीं है। उन्हें वहां से धक्के देकर निकाला गया ताकि पुलिस बेरोकटोक धांधली करा सके। उन्होंने कहा, “मेरा मन अब इस लोकतंत्र को स्वीकार करने की गवाही नहीं देता। इसलिए मैंने तय किया है कि चूंकि नौदा के लोगों ने मुझे भारी मतों से जीतकर विधायक बनाया है, इसलिए मैं उनकी सेवा करता रहूंगा, लेकिन विधायक के तौर पर विधानसभा में कभी प्रवेश नहीं करूंगा और पूरे सत्र का बहिष्कार करूंगा।”